कुल जननी-बेटियाँ

कुल जननी-बेटियाँ

बिटिया बड़ी हो गयी, एक रोज उसने बड़े सहज भाव में अपने पिता से पूछा – “पापा, क्या मैंने आपको कभी रुलाया?

पिता ने कहा -“हाँ ”

उसने बड़े आश्चर्य से पूछा – “कब” ?

पिता ने बताया – ‘उस समय तुम करीब एक साल की थीं,
घुटनों पर सरकती थीं।

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मैंने तुम्हारे सामने पैसे, पेन और खिलौना रख दिया क्योंकि मैं ये देखना चाहता था कि, तुम तीनों में से किसे उठाती हो तुम्हारा चुनाव मुझे बताता कि, बड़ी होकर तुम किसे अधिक महत्व देतीं।
जैसे पैसे मतलब संपत्ति, पेन मतलब बुद्धि और खिलौना मतलब आनंद।

मैंने ये सब बहुत सहजता से लेकिन उत्सुकतावश किया था क्योंकि मुझे सिर्फ तुम्हारा चुनाव देखना था।

तुम एक जगह स्थिर बैठीं टुकुर टुकुर उन तीनों वस्तुओं को देख रहीं थीं।
मैं तुम्हारे सामने उन वस्तुओं की दूसरी ओर खामोश बैठा बस तुम्हें ही देख रहा था।
तुम घुटनों और हाथों के बल सरकती आगे बढ़ीं,


मैं अपनी श्वांस रोके तुम्हें ही देख रहा था और क्षण भर में ही तुमने तीनों वस्तुओं को आजू बाजू सरका दिया और उन्हें पार करती हुई आकर सीधे मेरी गोद में बैठ गयीं।
मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि, उन तीनों वस्तुओं के अलावा तुम्हारा एक चुनाव मैं भी तो हो सकता था।

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वो पहली और आखरी बार था बेटा जब, तुमने मुझे रुलाया और बहुत रुलाया…

भगवान की दी हुई सबसे अनमोल धरोहर है बेटी… “बेटीयां सब के मुकद्दर में, कहाँ होती हैं ,जो घर ईश्वर को पसंद हो, वहां ही बेटी होती हैं”

दुनिया में सब कहते हैं ना! कि बेटी है!! एक दिन इस घर को छोड़कर चली जायेगी! मगर मैं दुनिया के सभी माँ-बाप से ये कहना चाहता हूँ!!


कि बेटी कभी भी अपने माँ-बाप के घर से नहीं जाती!! बल्कि वो हमेशा उनके दिल में रहती है!!-
मेरी ओर से देश की सभी गौरव शाली बिटिया व उनके भाग्यशाली माता पिता को धन्यवाद जिन्होंने कम से कम एक बिटिया को दो कुल (मायका तथा ससुराल) की रक्षा के लिए जन्म दिया।🙏🏻

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