दादा कहते थे दया दुर्बलता है

दादा कहते थे दया दुर्बलता है

🌷एक मुर्दे को भी लोग आसानी से नहीं छोड़ते..तुम तो जिंदा हो कैसे छोड़ देगें..

तो धर की भी सेवा करके निकलो.. धर वाले परीक्षाएं लेते हैं..

हमारे पास जो लोग आए हैं सब परीक्षाएँ देकर आए हैं.. वेद वाक्य पर जो नर चले..उसको लोग भृष्ट नर कहते..

🌷जितनी राह पर रुकावटें आती है तुम्हारे प्रेम को ओर बढ़ती है .

एक बार पानी बह रहा था.. चट्टान को अंहकार आया तो पानी को रोकने के लिए गिर गई..

पानी रुक गया पर थोड़े दिन बाद ओर तेजी से झरना बन कर निकला..

ओर भी सुंदर लगने लगा..तो बंघने से शक्ति चले थोड़े जाती है..बांध बना कर बिजली पैदा करी जाती है..

🌷अगर हम किसी के ऊपर दया करें..तो उसकी शक्तियां कैसे प्रकट होगी..

एक बार कोकुन में तितली तैयार हो रही थी..पर वो कीड़े जैसी थी..कोकुन थोड़ा टुटा था..

बच्चे ने देखा सोचा कीड़ा है तो उसने तोड़ कर उस पर दया करी..

तो तितली की बच्चा थोड़ी देर में मर गया..बड़ा अफसोस हुआ..

संत देख रहा था..बोला तुमने उसके पंख नहीं निकलने दिए..तभी मर गया..वो कोकुन के अंदर रहता तो उसके पंख निकल आते..

🌷गुरु भी तुमको परिवार में रखता है कि तुम वहीं रह कर पक सको यहाँ आकर रहने को..

पर हम नहीं रखते ..क्योंकि तुम मरना नहीं चाहती..शादी भी नही करती क्योंकि वहाँ भी मरना पड़ता है..

जब तक तुम संघर्ष नहीं करोगे तो कच्चे रह जाओगे..

🌷गुरु के यहाँ भी कहते हो रख लो सेवा करेगे..पर जरा सा काम करके गप्पे लगा रहे हो..

तुम्हारी निगरानी कौन करेगा..गुरु तुमको आश्रय देकर भिखारी नहीं बनाता है..जहाँ रहते हो वहीं मेहनत करके आगे बढ़ो..

🌷एक आदमी का कितना खर्चा होता है..तुम किसी पर बोझ मत बनो..ना किसी का आधार लो ना किसी को आधार दो..दादा ने बोला हरेक का घर आश्रम है..

वहीं बैठकर सेवा भी करो..सत्संग भी करो..तो धर के सदस्यों के कान में भी ज्ञान पड़ेगा..

किसी के कर्म भी नही देखो..यहाँ आओगे को भी कर्म देखोगे..अगर आदत पड़ी है..

🌷पहले ब्रह्मकुमारी वालों ने ॐ मंड़ली बनाई थी

गुरु लेखराज के पास बहुत सी औरते रुपया पैसा लेकर आ गई..

उनको अच्छा अच्छा खाने को मिला बड़ी खुश थी..पर जब पैसा खत्म हो गया..

कहा जाकर सत्संग करो वहाँ से पैसा लाओ. अब मुसीबत हो गई..

लोग कहें ये भिखारी बन गई..फिर जो अच्छा सत्संग बोल लेती थी उसे अच्छी साड़ी मिलती थी..क्योंकि उसको सीट पर बैठना होता था..

जो नहीं कर पाती थी उससे झाडु पोंछा बर्तन कराए जाते थे..फिर आपस में जलन होने लगी..रात में एक दुसरे के कपड़े काट देती थी..

🌷दादा ने वहाँ से सीखा कि कभी किसी से धर नहीं छुड़ना है..

दादा कहते थे कभी किसी पर दया नही करना. दया दुर्बलता है..

🌷एक हमारे पास आई ..बोली हमें अपने धर रख लो..हमें दादा की बात याद आई..

हमने कहा दादा की मना है. तो नहीं आई..बाद में कुछ समय बाद आई..

हमने कहा आप तो बहुत ठीक हैं अब..बोली हाँ अब जीना सीख लिया है ज्ञान से..

तभी दादा की बात याद आई ..कि किसी के शरीर का आधार न लो न आधार दो.. ज्ञान का आधार दो..हरेक अपनी मेहनत से ऊपर उठे..

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