गुरु ऐसी चाबी दे देता है जिस से ये सारे काल्पनिक बंधन तोड़ देता है

गुरु ऐसी चाबी दे देता है जिस से ये सारे काल्पनिक बंधन तोड़ देता है

सच्चा गुरु किसीको झुकाता नहीं है। तो तुम क्यों दूसरो को जुकाता है? तुम सबके सामने मन को झुकाओ। तुम बाहर से झुकता है पर अंदर में गालियां देता है।

Morality is Hypocrisy. ये तुम पाखंड करते हो। प्रेम सबसे करो। सेवा सबकी करो पर कभी भी शिकायत नहीं करना की मेरी सेवा तुमने क्यों नहीं की?

जब तक सच्चा प्रेम नहीं रहेगा गृहस्थ में वहा कभी शांति नहीं होगी। तुम घर में राज़ चलाएगा तो हमेशा दुखी रहेगा।

स्त्री की इज्जत जहां नहीं है उसके घर में मटके का पानी भी सुख जाता है। तुम प्रेम का राज़ चलाओ ना, तो घर स्वर्ग हो जाएगा।

धन का, प्रेम का, सेवा का कंजूस मत बनो। एक और बड़ा कंजूस है अपने को भगवान नहीं जानना।

It Is A Sin Not To Say I Am God. तुम्हारे चेहरे पर कैसा आनंद होना चाहिए ? तुम्हे कोई देखे तो उसे लगे की तुम्हे कुछ मिल गया है, हमेशा चेहरे पर मुस्कुराहट होनी चाहिए। सत चित आनंद स्वरूप वाले का चेहरा कैसा होना चाहिए?

मूर्ख गांठ खोलता नहीं है। सबके अंदर प्रेम का सागर है, मेरी एक बूंद के प्यासे सब।

इतना प्रेम परमात्मा ने सबके अंदर भरा है, पर मूर्ख बाहर से ही प्रेम कि अपेक्षा रखता है।

इसलिए उस पिता को गुरु ने बोला कि अगर तुम्हारा बेटा तुम्हारे पाव नहीं छूता है तो तुम जाके उसके पाव छुओ। उस पिता ने बात मानी और अपने बेटे का पाव छुआ, वो बेटा ही बदल गया और झुक गया।

शरीर के लिए योगा, मन के लिए योग जरूरी होता है
शरीर के लिए योगा, मन के लिए योग जरूरी होता है

Why You Are Burning Your Blood with The Mistake Of Others? तुम अपना खून क्यों जलाते हो।

ये जो पूरे दिन घर में बड़बड़ करते रहते हो, उस से क्या फायदा हुआ है? गुरु हमे रमज़ सिखाता है।

तुम्हारी रहनी से कोई सीखे, सब अपने आप ही सीखेंगे।

साई जन ने बताया कि किसने दूध खुला छोड़ दिया तो 250 रुपए के लिए में पहले इतना सोचू, फिर आंखो में क्रोध लाऊ, फिर शब्दो में क्रोध लाऊ फिर उनको बोलु।

अपनी अशांति क्यों मोल लू? तुम्हारी रहनी से सब सीखेंगे। तुम शांत करो कोई और नहीं। ज्ञानी में इतनी मौन आ जाती है, की परमात्मा से मिलके एक हो जाता है।

गुरु ऐसी चाबी दे देता है जिस से ये सारे काल्पनिक बंधन तोड़ देता है।

असल में कोई बंधन है नहीं, पर तुम मान के बैठे हो की बंधन है। ऐसी शिक्षा गुरु देता है कि सुख दुख नहीं भासता है, शब्द नहीं लगते है, सबसे उपराम कर देता है।

गुरु तुम्हे रोज इशारा दे रहा है कि जो समय बचा है उसकी value करो।

शिक्षक वोही है जो समय का पाबंद हो। और ब्रह्मज्ञानी से बड़ा समय का पाबंद कोई होता ही नहीं है। तुम सब जगह देरी से पहुंचते हो। ज्ञानी का हर काम before time चलता है।

जो तुम कहते हो कि ज्ञान में मन नहीं लग रहा है, क्युकी तुम अपने टाइम को लेके aware नहीं हो। किसी भी काम के लिए तुम्हारा पूर्ण समर्पण है ही नहीं।

ज्ञान और गुरु एक सिक्के के दो पहलू है। तुम गुरु से लिंक जोड़ोगे तो गुरु ज्ञान से लिंक जोड़ेंगे।

पहले गुरु फिर ज्ञान। गुरु तुम्हे वो ज्ञान देगा जो तुम्हारी प्रकृति के हिसाब से होगा। गुरु समय देख के, प्रकृति देख के, तुम्हारे मन को क्या समझना है वो गुरु को प्रत्यक्ष पता होता है।

गुरु भण्डार है, कभी भी हमारी झोली में कुछ भी डाल सकता है, डाल भी रहा है, पर में भी catch करू।

तो शिक्षक दिवस है और हमारे गुरु से बड़ा हमारा शिक्षक कौन है।

आज के इस दिन पे Catch करना की गुरु समय की value करवा रहा है। आज ही ये change हो जाना चाहिए। साकार गुरु सामने है, उसका हाथ हमारे ऊपर है, उनके वचन मतलब ब्रह्मवाक्य है, ये मौका ना गवाना।

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