dada bhagwan vaani

गुरु के प्रेम के सागर में खुद की मैं को मिटाना ,डुबोना है

गुरु जी ने बताया कि

🌸ज्ञान और प्रेम में क्या अंतर है,? ज्ञान माने सच्ची विद्या

🌸ज्ञान से समझ मिलती है अंदर का विवेक जागृत होता है ,ज्ञान से परमात्मा को जाना जाता है।

🌸प्रेम से परमात्मा को पाया जाता है महेसुस किया जाता है,।

🌸हिस्ट्री मतलब इतिहास सबको पता है,लेकिन मिस्ट्री मतलब परमात्मा का रहस्य ,,वो ही जनता है जो प्रभु के प्रेम में खुद को गुम कर देता है,।

🌸ज्ञान से हम प्रभु को जानते है,फिर प्रभु से प्रेम हो जाता है,तभी हम प्रभु का ही रूप बन जाते है,,,,,,,,।

🌸पंछी के दो पंख होते है,एक इश्क,एक अक़्ल, उसी से वो उड़ते है,,,,,ऐसे ही जीवन जीने के लिए भी हमे दो पंख चाहिए,,,, एक ज्ञान और दूसरा वैराग्य,,,,,,,,,,।

🌸संसार का प्रेम देह से जुड़ा होता है,पर सच्चा प्रेम ज्ञान से जुड़ा होता है,,,,,,,,,,।

🌸सिर्फ ज्ञान हो और प्रेम ना हो तो वो व्यर्थ है,प्रेम निभाना भी गुरु ज्ञान से आता है,,,,,,,,,,,।

🌸ज्ञान से समझ मिलती है लेकिन प्रेम से भरपुरता आ जाती है,,,,,,,,,।

🌸मर्ज इन टू ओसियन मतलब गुरु के प्रेम के सागर में खुद की मैं को मिटाना ,डुबोना है,,,,,,,,,,।

🌸शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ,,,,,,,,,,।

मुनष्य जिस डाल पर बैठा है..उसको ही काट रहा है

मुनष्य जिस डाल पर बैठा है..उसको ही काट रहा है..

सुख प्रप्ति के लिए वह सुखों को बटोरता है..इच्छा करता है..

इच्छाओं के गुच्छे उसके दिमाग में भरे पड़े है..समझता है इच्छा पुरी होगी..तो में सुखी हो जाऊँगा..पर सुख के बदले अंसतोष मिलता है..

बड़ी इच्छा उसे इतना विचलित कर देती है जो इच्छा प्रप्ति की कल्पना का सुख उसे चैन लेने नहीं देता..या इच्छा के पीछे दौड़ते दौैड़ते शरीर की शक्ति इतनी गंवा देता है कि उसे प्राप्त नहीं कर पाता..

उसने चाहा क्या उसे मिला क्या..संतुष्टि चैन सुख निर्इच्छा होने पर प्राप्त होता है..

इच्छा करने या इच्छा पुरी होने पर नही..इच्छा को केवल इपने तक सीमित ना रखें..कि कोई अपना व्यक्ति उसके लिए सोचे..इसको ऐसा चलना चाहिए. रजो गुणी तमो गुणी नहीं..

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दुनीया का झूठा झमेला
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ये तेरा खुद का रजो गुण है ..दुसरे का रजो गुण कैसे छोड़ेगा..

अपने को जान अपने को समझ..में चाहुँ ए बी पर जुल्म न करे..बी क्युँ ना अपना निश्चय करे ..

जो कोई उस पर जुल्म कर ही ना सके..

हमारे आगे जो आए उसकी नेष्टा बड़े..ना कि जुल्म ना कि.. मुजलिम.. जलिम ना देखें .. एक ही परमात्मा देखे..
ञिपुटी में आएगा तो निराकार चला जाएगा..
हरी ॐ जय गीता श्याम की🌹🌿🌹🌿🌹🌿

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