गुरु ने जीवन राजा जनक की तरह संसार मे गृहस्थ में रहते हुए निरासक्त बना दिया

गुरु जी ने बताया कि

🥀गुरु ने जीवन राजा जनक की तरह संसार मे गृहस्थ में रहते हुए निरासक्त बना दिया,,,,,,,,,,,,,।

🥀एक व्यक्ति चलती ट्रेन में अपनी पेटियां अपने सिर पर रखकर खड़ा था, सब हसने लगे , बोले जब ट्रेन तुम्हारा वजन उठा रही है, तो क्या तुम्हारी पेटियों का वजन नही उठाएगी ?, हम भी ऐसा ही करते है अपने सिर पर ” मैं मेरे ” की पेटियां अपने सिर पर रखें रहते है,,,,,,,,,,।

🥀देह अध्यास गटर की तरह है, उसको छोड़कर आत्म निश्चय में आना है,,,,,,,,,,।

dada shyam geeta bhagwan

🥀बरसों से मन मे मैं मेरे की पोटलियां पड़ी है वो माया की बातों से नही गुरु के वचनों से हट ती है,,,,,,,,,,,,।

🥀जीव भाव वाली छोटी छोटी बातों को खिंचकर लंबा करके दुखी होते रहते है,,,,,,,,,,,।

🥀पुरानी बातें याद करके पुरानी पोशाक पहनकर परेशान होते रहते है,,,,,,,,,,,।

🥀गुरु आते जाते नही वो तो है ही है हर पल हर जगह,,,,,,,,,,,,।

🥀शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ,,,,,,,,,,,,।

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