Guru vaani 10 July 2019

Guru vaani 10 July 2019

शरीर करते हुए दिखता है पर इसके पीछे जो शक्ति कार्य कर रही है..वो नही दिख रही है..चर्म की आँख से नही देख सकते..

कान से नहीं सुन सकते..इसके पीछे कौन देख रहा है..कौन काम कर रहा है..जब लग जाने मैं कुछ करता..

तब लग गर्भ जून मैं गिरता..अपने को करने वाला नहीं मानो..

हमको लगता है कि ये हम से उलटा चल रहा है..पर उसी समय मन की सुई अपनी तरफ मोड़ दो..तुम भी तो

अपना मतलब देख रहे हो..तभी वो बुरा लग रहा है..तुम्हारी जैसी नजर है वैसा ही दिखता है..

एक आदमी ने सिनरी बनाई..सोचा बहुत अच्छी है..तो उसमें लिख दिया..इसमें कोई गलती निकाल कर दिखाओ..

शाम को आया तो ढेरों गलतियां लिखी थी..उदास हो गया..कि इतनी गलतीयां हैं..दोस्त ने कहा अब दुसरी सिनरी बनाओ..

उसमें लिख दिया..

Guru Ji ke bhajan – click here

इसकी अच्छाईयां लिखो..तो शाम तक ढेरों इच्छाइयां लिखी थी..कमियों से भी ज्यादा..

हम जैसा मौका लोगों को देते हैं वैसा ही हो जाता है..

रबिया ने ग्रंथ से वो लाइन काट दी..जिसमें लिखा था शैतान से नफरत करो..बोली मेरे लिए कोई शैतान है ही नही..

दुनियां बुरी नहीं है बुराई अपने मन में है..हमारी इच्छा के कारण कोई हमें बुरा लगता है..

तुम प्यार करते जाओ अपने आप प्यार बढ़ता जाएगा..

दादा से किसी ने कहा दादा आप भी तो अज्ञानी देख कर प्यार करते हो..

बोले सुरज ने कभी अंघेरा देखा ही नही..ज्ञान को ग्रहण करो..ज्ञान को खाली पढ़ो नही..

बारिश बरसती है बरकत की प्यास बुझती है पुरुषार्थी की..जैसा तुम कर्म करोगे वैसा ही फल पाओगे ..

ज्ञानी तो सबको एक रुप करके देखता है..पर तुम्हारी अपनी अपनी श्रद्धा ..

जो जैसा भाव जगाए वो वैसा ही फल पाए..याद रख दुनियां नहीं है दिल लगाने की जगह..

अपने शरीर को नहीं पकड़ सकते हैं .कहाँ जोर चलता है अपने शरीर पर..

बिल्डिग की संभाल करो फिर भी गिरती है..कितना भी व्रत उपवास करो पर जो होना है वही होगा..

करवां चौथ रखने से आयु बढ़ नहीं सकती घट नही सकती..

लिखया लेख ललाट का मेट सके ना राम ..मेटे तो समर्थ है समझ किसा है काम..

अभिनेता को पता है..लड़की कहाँ है..पर फिर भी सीता बनी तो राम उसको ढुढ़ता है..क्योंकि उसको वैसा पार्ट मिला है..

राम ने पार्वती को प्रणाम किया..दो सीता बनी थी..बोले प्रणाम मातेशवरी..तो पार्वती जी समझ गई की राम ने जान लिया है..

खेल सब बदलता रहता है..तुम खेल को देखो कुछ बन कर मत बैठो..चाहे जीव बनो या ब्रह्म बनो बनना ही है अज्ञान बड़ा..

तुम अपने हृदय को साफ करो भगवान सब कार्य कर रहा है..अकर्ता भाव सच्ची समाघि है..

अष्टाव्रक गीता में पुरे समय अकर्ता भाव की बात चली..ये में विलीन हो जाए तो सच प्रकट हो जाए..

कोई चला जाता है तो तीसरे दिन उठाला कर दिया जाता है..कौन बैठे बारह दिन..

औरत आदमी सब नौकरी करते हैं..औरते होशियार करके बैठती है..

पानी निकलता रहे तो साफ रहता है..तुम अपना प्रेम भी लुटाते रहो तो बढ़ता जाएगा..🌹🌿🌹🌿🌹🌿

684 Shares
Share via
Copy link
Powered by Social Snap