Guru vaani 12 March 2019

ज्ञानी ऐसे लोगों के साथ रहता है जिससे उसकी उन्नति होती है..जो हमारी उन्नति में बाघक बने उसका साथ ना करना..ज्ञानी बुरे व्यक्ति से बचाव के उपाय कर लेता है..


गीता भगवान के पास एक औरत आती थी खाने के टाइम पर कि ये खिलाएगे ..भगवान बोलते थे कि जाओ तुम्हारी बहु इंतजार कर रही है..जहाँ तुम्हारी प्रारब्घ है वहाँ खाओ पीओ रहो जाकर..
ज्ञानी से भी चाहते हैं कि द्वैैत के कर्म करे..हमको टीका लगाओ..हमको राखी बांघो..तो हम द्वैत के कर्म क्यों करे..


सारा दिन आना जाना करते रहते है..कहते हैं दरवाजा क्यों बंद है..तो क्या हम सारा दिन तुम्हारा स्वागत करने के लिए तैयार रहे..तुम्हारी बकवास सुनते रहें..


दादा ने बोला जो तुम्हारा टाइम किल करते है उनसे सावघान रहो..कोई आकर तुम्हारी बगल में बैठता है..छुता है तो उससे सावघान रहो..अलग बैठो..हम क्यों किसी को फायदा दे..ज्ञानी आखिर तक सावघान रहता है..


गीता भगवान के पास एक आकर बैठा बार बार कुर्सी आगे खिसका रहा था..गीका भगवान कुर्सी पीछे करते जा रहे थे..गीता भगवान कभी अकेले में किसी को नहीं बुलाते थे..कहते थे कोई दुसरा बैठा होगा तो कुछ देर में बोर होकर चला जाएगा..उसको ज्यादा अच्छा नही लगेगा..


कोई हाथ छुता है ..कोई पैर छुता है..क्यों कोई छुत की बिमारी है तुमको..दादा कहते थे..तीन तीन फीट दुर बैठो..पेड़ के नीचे अलग अलग बैठकर अभ्यास करो..


हम सब एक धर में रहते है..पर सोते अपने अपने कमरे में हैं. पता चला बगल में किसी को सुलाने की आदत पड़ जाएगी..जब अकेला ब्रह्म है तो किसी के साथ की क्या जरुरत..


एक थाली में क्यों खाते हो क्या इसी मे प्यार है..एक दुसरे के कीटाणु आ जाते हैं..शादी करते हैं एक थाली में खिलाते हैं क्यो..जब अपने पति तक से परहेज है तो ओरों की क्या बात..
ज्ञानी में लापरवाही नहीं होनी चाहिए..ज्ञानी व्यर्थ में बात भी नहीं करता है..क ता है कोई फोन पर ज्ञान सुना दीजीए..हम कहते हैं कैसेट ले जाओ..


ज्ञानी प्रंशसा करने वालों से भी सावधान रहता है..तुम अच्छा गा लेते हो लोग कहेगे तो कहोगे रिकाडिंग नहीं कराई है अभी..प्रंशसा सुनकर बहुत खुश हो जाते हो..


हमारे सतसंग मे कोई अखबार वाला आकर बैठता है तो भाग देतेे हैं कहते हैं हमें मशहुरी नही चाहिए..अखबार में मत छपना..


तुम ब्रह्म स्वरुप हो अपने को जानो ..खाली सेवा ही ना करते रहो..इतना कबिल गुरु ने बनाया है तो नौकर वाले काम क्यों करते हो..वो तो नौकर भी कर लेगें..


डैडी अस्पताल में थे..पैर सड़ गया था..हम लोग एक दिन भी अस्पताल में नहीं रहे..किसी सतसंगी ने सब इंतजाम किया..सेवा वाले तो बहुत मिल जाएगें..पर परमात्मा ने जिस काम के लिए चुना है वो करो..दुनियां वाले तो कहेगे ही कि ये भी तो निष्काम है..तो तुम धर में ही सेवा करती रहो..हम लोगों को भी लोग कहते थे कि ये रुलती रहती है..हमने बोला हमें मालुम है हमारी तरक्की किस में है..
अगर माया की सेवा मे़ं लगते तो कोई कहता हमारे यहाँ डिलीवरी हुई है आ जाओ..कोई कहता बिमारी है आ जाओ.तो हमारा समय इसी में चला जाता..

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