vaani 16 march

Guru Vaani 16 March 2019

क्रोध से शक्ति घटती है और जब भी क्रोध आये तो उस जगह से हट जाओ और एक गिलास पानी पी लें तो शांति aa जाएगी. कोई हमसे कैसा भी चले हमको उसको प्यार से बात करें और उसको माफ कर दें. बहते पानी की तरह सबको माफ करते जाये. उदार चित्त हो जाए. बुराई करने वाले से भी भलायी करें.

किसी को भी मन से कुछ गलत नहीं सोचें नहीं तो हमारा नुकसान हो जाएगा. भगवान से प्रार्थना यही करना चाहिए कि उनके मन को बदल दें, किसी को भी नहीं धिककरें.

विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आप को बहुत कष्टों का सामना करना पड़ता है और अंत तक भगवान् की याद बनी रहती है. लोभ गुरु के वचनों की करो. और हम अहंकार के कारण अपने आप को bandha/ हुया पाते हैं.


🌷 अपना जीवन मोह, Nafrat, hitesh bhaiya से सीखा है.
Guru ने हमको सही raasta dikha kur moh maya से हटा दिया गया है 🌷


💜 Ghar बार छोड़ना चाहते हैं तो यह सत्संग का हिस्सा नहीं है. हरएक के मन में उथल पुथल है और गुरु वाणी से सब शांति हो जाती है इसलिए सत्संग आना चाहिए और जीवन में उसको लगाएंगे तो फायदा होगा.


🎤🎼BHAJAN 🎤🎼🎤
तुझमें ओम मुझमे ओम जग में ओम समाया है, सबसे कर ले प्यार जगत में कोई नहीं पराया है 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷

गुरु जी ने बताया कि,,,,,,,
🌷परमात्मा ने खोया में है ना पाया में है,,,,परमात्मा तो होने में है,मतलब प्रभु मय हो जाएं,,,,,,,।
🌷परमात्मा से भक्त ने कहा मेरे जीवन से भी आप अपना काम ले,मतलब मेरा जीवन सबकी सेवा में सबके भले में ही जाएं,,,,,,।


🌷तस्वीर जूठी तस्वीर का वर्णन भी जूठा,,,, मतलब माया जूठी माया की बाते भी जूठी,,, सच सिर्फ एक परमात्मा,,,,,,,।


🌷होली तो हर साल मनाते है,,,,क्या हम प्रभु के,,,गुरु के हो लिये,,,,,?,,,,,
🌷ब्रह्मचर्य मतलब देह से मन से अलग आत्मा में स्थित ,,सच्चा ब्रह्मचर्य,,,,,,,,,।
🌷भक्त ने कौवे से कहा मेरा शरीर भले ही खा लेना पर मेरी आँखें मत खाना,,, इसमें प्रभु मिलन की आश है,,,,,,,।


🌷भक्त का हाथ कर्म में और मन प्रभु सुमिरन में रहता है,,,,,,,,।
🌷शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ,,,,,,,।

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