guru vaani 17 may

Guru vaani 17 May 2019

🌷जैसे गंगा नदी में जो पत्थर पड़े होते है,वो गंगा नदी में पड़े पड़े इतने स्वच्छ और गोल हो जाते है कि हम उनको लाकर शिव लिंग की तरह पूजते है,ऐसे ही गुरु जी कहते है कि हम खुद को भी सत्संग में लाकर बिठा ले,ज्ञान के वचनों में भीगकर हम भी न जाने कब पूजनीय बन जाते है,हमे पता भी नही चलता,बस खुद को प्रभु की शरण मे रखें,,,,,,,,।

Dada bhagwan Notes

dada shyam bhagwan meera bhagwan
Dada Bhagwan


🌷हम अपने शुद्ध और पवित्र कर्मो से खुद का भाग्य बदल सकते है,,,,,,,।
🌷हमारे शुद्ध और पवित्र कर्म हमारी रक्षा करते है,,,,,,।
🌷ना किसी भी बात में खुद अटको न किसी को अटकाओ,,,,,,।
🌷भक्ति मतलब प्रभु से जुड़न,,,,,,।


🌷स,सच्चे,,,,
म,मन से,,,,
स,,,सुमिरन,,,,
प्रभु का सुमिरन सच्चे मन से करें,,,,,,,,,।


🌷चरण कमल तेरे धोये धोये पीवा, मतलब गुरु आपके वचनों को जीवन मे लगाऊं,,,,,,,,,।
🌷किसी को भी कार्य मे आधार मत दो,वरना वो आधारित हो जाएगा,सहयोग दो जिस से वो सफल हो सके,,,,,,,,,,,।
🌷शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ,,,,,,,,,,।

Guru vaani 17 may 2019

गुरूवाणी(17-5-19)
(“तुम कर्म करते जाते हो,पता नही चलता,पर जब कर्मो का हिसाब किताब मिलता है,तब रोते हो।
*फिर कहते हो,भगवान कौन सा कर्म है जो ऐसा बच्चा दिया,ऐसा आदमी दिया है।
*पर कर्मो का हिसाब किताब तो काटना ही है,कर्मो की गति गहन है
*देखने वाला लाख आंखों से भी तुम्हे देख रहा है,मुह से किछ नही जानता है।
*तुम एक एक मिनट में कितने कर्म बना रहे हो।


*कहते हो,जीव हत्या नही करते,पर ब्रह्महत्या तो कर के बैठे हो।,जब भगवान को भुला कर मनुष्य कर मनुष्य देखते हो।
*गीता में लिखा है,जो किसी को मनुष्य जान कर द्वेष करता है,वो मुझ अंतर्यामी से द्वेष करता है।
*मनन के लिए समय मिला है,अपना मनन करो ठंडे में बैठ कर,,क्यों किसी के कर्मो में जाते हो।


*जिसका जो भाग्य है,वो उसको मिल रहा है,तुम किसी के रहन सहन में ,कर्मो में क्यों जाते हो।
तुम अपना उद्धार करो,ये मनुष्य जन्म मिला है,इससे अपना काम उतार कर बैठो।
*गुरु की करुणा है,वो तुम्हारे सब गुनाह माफ करके बैठा है,तुम उसके वचनों पर चलो।
*कोयला कबहु न ऊजला,चाहे नौ मन साबुन धोय।
धोते धोते पूरी नदी ही काली हो जाएगी,पर कब ऊजला होता है,जब इसे भट्ठी में जलाते है।
*तो तुम्हे भी तप की भट्ठी में जल कर साफ होना है।
*ज्ञान अग्नि दग्धे कर्मा।)))
जय गुरुदेव,शत शत नमन🌹🌹🌹🌹


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