Guru vaani 20 August 2019

Guru vaani 20 August 2019

गुरु जी ने बताया कि,,,,,,,,,

☘सल्लीन मतलब स्वयंम में लीन होना,,अपने भीतर प्रभु का दीदार करें,,,,,,,,,,।

☘अपने विचारों को हटाने के खुद मालिक बने,,,,,,,,।

☘अगर हमसे किसीका भला हो रहा है तो समझो प्रभु की कृपा हुई है हम पर,,,,,,,,,,,।

☘बदकर्म से दुख होता है,सद्कर्म से अहंकार आता हैं, परमात्मा ने दोनों से छुड़वाया,,,,,,सहज होकर अकर्ता

बनकर किया हुआ कर्म निष्काम होता हैं,,,,,,,,,।

☘सत्संगियों को मान नही चाहिए, वो तो आत्मा में टिका होता हैं, मान माया वालो को चाहिए,, उनको मान

देते चलो,,,,,,,,,।

☘प्रेम से पकाया हुआ,,प्रेम से परोसा हुआ भोजन सात्विक होता हैं,,,,,,,,।

☘क्रोध में पकाया ,परोसा हुआ भोजन तामसी भोजन होता हैं,,,,,,,,,।

☘किसी आशा और उम्मीद से पकाया हुआ परोसा हुआ भोजन राजसी भोजन होता हैं,,,,,,,,।

☘जो पेड़ फल और छाया देते है वो पेड़ सबको पसंद होता है,,,,,,,अपनी इन्क्वायरी करें हम कौन से पेड़

है,,,?,,,,,

☘सारे शास्त्र हमे मौन रहना सिखाते है,व्यर्थ ना बोले जितना बोले मीठा बोले,,,,,,,,,।

☘शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ,,,,,,,,,,,,।

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