Guru vaani 22 March 2019

  • जब सब कुछ बना पड़ा है तो में क्यों अपनी चलाता हूं? जब मे रोज सत्संग में आ रहा हूं तो ये क्यो नहीं समझ रहा हूं? अपनी होनेस्टी (ईमानदारी) बढ़ानी पड़ेगी।
  • अपनी मुक्ति का ख्याल तो करो। खुद को सयाना मान के बैठे है। 100 के आगे से 1 निकल जाएगा तो 00 रह जाएगा, वो 1 है परमात्मा। उस 1 की ही वैल्यू है।
  • मन को हमने छुड़वाघ बना के रखा है। इस मन को कबी बेशर्मा करो, अनमोल जीवन गवा रहा है। कबी तो मन को समझाओ की तूने मुझे हर बार गुरु के oppose में ही काम करवाया है, अब तो बदल। बदलना ही पड़ेगा।
  • गीता भगवान कि वाणी रोज 5-10 मिनट सुननी ही है। “मुझसे नहीं होता है” ऐसा कहना ही नहीं है।
  • किसी की शिकायत ना करो और ना सुनो। कोई करे तो उसके मुंह पे प्लास्टर लगा दो। परमात्मा के सिवा कुछ और सुना तो सुनने की शक्तियां कम हो जाएगी, कुछ और बोला तो बोलने कि शक्तियां कम हो जाएगी। जो शक्तियां मिली है उसका सदुपयोग होना चाहिए, नहीं तो धंड है।
  • समय बचाओ। समय बचेगा तो निष्काम का समय मिलेगा और लोकरित को काटना भी सरल होगा।

गुरु रोज यही समझा रहे है, की तू आत्मा है। दादा का भी यही मेसेज था कि शल अपने ऊपर कृपा करो, और वचनों को हृदय में बसा के जाना। आखिर और कितना समय चाइए? आखिर गुरु की तरफ से क्या बाकी रह गया है? अपने ऊपर कृपा करो। अपने ऊपर कृपा करना ही गुरु की सेवा है।

हरी🕉

गुरु जी ने बताया कि


🌷बुद्धि सबके पास होती है लेकिन विवेक सबके पास नही होता,वो सिर्फ प्रभु ने हमको दिया है ,,हम भाग्यशाली है,अपने विवेक का सही इस्तेमाल करें,,,,,,।


🌷प्रभु ने चार वर्ण बताये,,,,,
🌷ब्राह्मण,,जिसका आचरण ब्रह्म सहित होता है,,सबको सुख देते है,,,,,,


🌷श्रत्रिय,,, जो अपना कर्म एक योद्धा की तरह करते है,,,,,,
🌷वैश्य,,,,,जो अपना कर्म धर्म सहित करते है,,,,,,


🌷शुद्र,,,,जिनका वर्ण निचा होता है लेकिन कर्म उत्तम होता है,,,,,,,
🌷जिसका व्यवहार ठीक नही उसका परमार्थ भी ठीक नही,,,,,,।
🌷ब्राह्मण वो जो ब्रह्मा के मुख से पैदा होते है,,,,,,,।


🌷यहां ब्राह्मण गुरु को बताया है,,,जैसे ब्राह्मण धर्म सहित कर्म बताते है,,,गुरू भी आत्मा की स्थिति में कर्म बताते है,,,,,मतलब धर्म सहित,,,,,,।


🌷गृहस्थ में उदासीन मतलब उदास नही,,,,विरक्त,, अन अटैच्ड,,,,,,,।
🌷शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ,,,,,,,,,,।

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