guru vaani 23 march

Guru vaani 23 March 2019

Guru ji के प्रेम में डूबे हुए हैं इसलिये कोई बात नहीं लगती है.

  • 1,पत्थर की लकीर *जो अग्यानी की होती है जो कभी नहीं हटती है 🌷
  • 2. मिट्टी की लकीर *, जो कि jigyasu ki लकीर होती है जो कि गुरु के बताने पर हट जाती है 🌷
  • *3. पानी की लकीर *.. ग्यानी की तरह जो कि अपने में स्थित रहता है और
  • ❤ 4..”हवा में लकीर *. जो कि Brihm Gyani Guru की ही स्थिति होती है जो कि हर हाल में शांत रहता है और उसी की तरह हमलोगों को banna hai.


Paancho विकारों को दूर करने के लिए कोशिस करना चाहिए यह ग्यान सिर्फ अपने को ही सही करना है दूसरे को कभी नहीं देखो नहीं तो अगले की बुराई हमारे अंदर भी aa जाएगी.


🌷 जो भी जैसा चल रहा है उसे किनारे छोड़ दें और अपने मन में ध्यान मत दो. सबको मिले तेरी बख्शीश ए Dada ना कोई उदास हो. हरएक को तुरंत स्वीकार कर लें तो कोई गम नहीं लगेगा. साहस और धीरज से कार्य लेने पर सब कुछ ठीक हो जाएगा.

(“अगर अहंकार की जरी भी है तो आत्मा पक्की नही होगी।
*पढ़या होवे गुनहगार
अगर तुम पढ़ कर उसके ऊपर चले नही तो सब बेकार।


*सुनी सुनाई बातें सब बताते है,पर जो जीवन मे लगा ले उसकी बड़ी बात है।
*चरण धूल तेरे जन की होवा….. आत्माकार सदियों तक साथ रहता है।आज स्वामी रामतीर्थ का आदर्श है तुम्हारे सामने।


*हर रूप मेरे ही है,मैं ही हूं सबमे….ज्ञानी ऐसा जनता है,और सबको प्यार करता है।
ज्ञानी को आनंद आता है सबको प्यार करने में।


*जब तक गुरु से भी सुख लेने की इच्छा होगी,आनंद नही आएगा।
*तुम अपनी मौत खरीद करो,अपनी गरीबी खरीद करो…जब तन मन धन गुरु को दे दिया,तो तुम्हारा रहा क्या।


*Be nothing..do nothing..ये दादा जी का नारा है।
*करना अक्षर दिमाग मे है,तब तक कुछ न कुछ करना ही पड़ेगा।

pramila bhagwan


*तुम क्या करते हो,हाथ काम करता है,मुख बोलता है,इसमें तुमने क्या किया??
*कुछ न कुछ बन कर बैठे हो,,कभी सत्संग में भी बहु के लिए बात चल जाती है,तो सास खुश हो जाती है,कभी सास के लिए बात चलती है,तो बहू खुश हो जाती है…क्यों कि भगवत भाव नही है।।


*दादा ने बोला,अमीरों को ज्ञान नही लगेगा।
तो अमीर दुखी हो गए.. …तुम अपने को कुछ नाकुछ देह में कर बैठे हो,तभी दुखी होते हो।
*तुम्हे भगवान ने अपने जैसा बनाया है,तुम ठगी बेईमानी छोड़ दो…..अपना स्वरूप क्यों भूल गए?


*दुनिया मे लोग तड़पते रहते है,,सूफी संत भी कहते है,,शल हम सदा तड़पते रहे,,जिससे तेरी याद में रहें।
पर गुरु तुम्हे तड़पने नही देता,,तड़प दो में है,,गुरु तुम्हे मिला कर एक कर देता है। ये गुरु की करुणा है।


*लोग भगवान को जानते है,पर मानते नही,,उनकी विभूतियों को मानते है,पर जानते नही।
दुनिया मे 1 और 1 मिला कर 11 बताते है,पर गुरु 1 और 1 मिला कर 1 होने की बात कहता है…..हमे उस एक से मिल कर एक हो जाना है।

divine pramila bhagwan


दादा ने शुरू से ही द्वैत का खंडन किया……बोला।।ये सच है कि गुरु भगवान है,उसने सत्य को जाना इसलिए…..पर गुरु के पास आकर तुम भी शिष्य बन कर न रह जाओ…बल्कि उससे मिल कर एक हो जाओ…..ये गुरु शिष्य का भेद समाप्त होना चाहिए।


*गीता में 3 तरह की भक्ति बताई है………

1-राजसी भक्ति……जिसमे अलग अलग भगवान देखते है।
2….तामसी भक्ति-जिसमे एक मे भगवान देखते है।
3–सात्विकी भक्ति…..जिसमे सर्व में भगवान देखते है….यानी हर रूप में वही एक परमात्मा है।


हम God realisation की बात नही करते,,,हम self realisation की बात करते है।…..अपने को जानो,अपने को पहचानो,,सर्वत्र तू ही तो है।)


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