Guru vaani 23 Nov 2019

Guru vaani 23 Nov 2019

🌷सभी को Happy Birthday .गुरु सबके अंदर समाये पड़े है.

हर चेहरा जो प्रसन्न दिख रहा है, वो मेरे गुरु का ही है.

बहुत फक्र होता है-गुरु जी, दादा जी, गीता भगवान पर की उन्होंने कैसे सबके अंदर की ज्योत प्रगट की है.

बाहर से सबने दीपक जलाकर खुशियां प्रगट की है,

और क्यों ना करे ऐसा अवतार पाया है जग में. भगवान राम और कृष्ण को तो हमने नही देखा,

पर आज इस युग के अवतार को तो देखा भी, मिले भी,

और उनका प्यार भी पाया, तो क्यों ना अंदर से ख़ुशी मनाये.

🌷जिसने हर दिन खुशियों वाला दिया है, हर दिन त्यौहार बना दिया है,

कैसे सबके दुःख खींच लिए है, तो क्यों ना शुक्राना गायें, महिमा करे, गुणगान करे और उत्सव मनाये.

🌷 आज का दिन उत्सव नही महोत्सव है– क्यूकि ऐसे अवतार यूँ ही नही मिल जाते है.

बहुत बड़ा उद्देशय लेकर ये धरती पर आते है. ऐसी रूहें प्रगट होती है- जन – जन की जाग्रति के लिए,

सबको प्रेम देने के लिए. अगर इनका नाम प्रेम का सम्राट पड़ा तो यूँ ही नही पड़ा, सच्चा नाम पड़ा.

इन्होने सबके दिलो पर साम्राज्य स्थापित किया.

🌷इनके अंदर सभी अवतारों का समन्वय पाया.

क्राइस्ट की तरह उदार दिल भी रहे और सबके लिए कष्ट सहकर भी सबको क्षमा करने वाले.

भगवान कृष्ण जैसा ज्ञान और प्रेम इनके अंदर था, हर गोपी इनकी दीवानी थी.

🌷आज रोज सुबह-शाम का जो सत्संग होता है, ये सब गुरु जी की बदौलत.

उन्होंने दादा जी, गीता भगवान के ज्ञान का बीड़ा उठाया और अपने को पूरी तरह उसमे समर्पित करके अपने जीवन की आहुति दे दी.

लोग यज्ञ करते है और उसमे सामग्रियों की आहुति देते है,

पर गुरु जी ने अपना पूरा जीवन ही उस आहुति में डाल दिया.

🌷दो टाइम के सत्संग के बाद भी दिन रात की अहर्निश सेवा होती थी.

उनके अंदर इतना शौंक होता था की सामने वाले को कैसे खुश कर दे, कैसे प्यार दे,

इसके जीवन में कोई दुःख बचे ही नही.

और कुछ ऐसा भी होता था-इनके सामने आते ही शिकायते अपने आप ही गुम हो जाती थी.

🌷गुरु जी की खास विशेषता थी – पहले मित्रता करते थे फिर सच देते थे.

दुनियां में सब ज्ञान की भाषा ज्यादा बोलते है पर गुरु जी ने प्यार वाली दृष्टि पहले दी.

उसको अपना बनाया और ये अहसास कराया की तुम हमारे हो. फिर सामने वाला भी समर्पित होता.

🌷 आज यहाँ भी महफ़िल ना सजी होती अगर गुरु का प्रेम वाला हाथ ना होता.

आज हम उनकी कृपा का ही फल खा रहे है. कभी भूलना नही उनकी उदारता, क़ुरबानी, तप और प्यार को.

उनका हर संकल्प हम सबको पूरा करना है.

उनका एक ही संकल्प रहा- कि एक-एक को हसाउँगा, एक-एक को खुश देखना चाहता हूँ, एक-एक को आतम मस्ती में मस्त देखना चाहता हूँ.

🌷 आज गुरु जी की फोटो के आगे दीपक जलाया ये केवल शुक्राना गाने का एक तरीका मात्र है बस.

Guru ji birthday

बाकि जिसने अपनी आत्मजागृति कर ली, जो अपनी आत्मज्योति जलाके बैठा है, उसके आगे दीपक जलाने से कोई फर्क नही पड़ता.

जो स्वयं सूर्यवत् है उसके आगे क्या दीपक जलाये. ये सब मेहेरबानी गाने का तरीका है, बाकि तो गुरु को हम क्या दे सकते है,

“क्या करे गुरुदेव की भेट ना वस्तु दुखे तीन लोकन में, ब्रह्मानंद समान ना होए कभी,

धन माणिक लाख करोड़ दिया” लाख करोड़ खर्च करके भी हम वो नही कर सकते जो गुरु ने हमे मुफ्त में दिया है, और उसके बाद भी कभी अहसान नही जताया.

🌷धन्य महसूस करते है कि हमे ऐसा सच्चा गुरु इस युग में मिला. शल सबको ऐसा सच्चा गुरु मिले.
🙏🌺🙏🌺🙏

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