Guru vaani 30 June 2019

Guru vaani 30 June 2019

Guru vaani 30 June 2019 🌷ज्ञानी को मृत्यु का भी भय नहीं है..शरीर को जब जाना होगा तो तुम्हारी कोशिश भी बेकार हो

जाएगी..इन्दिरा गांघी राजीव गांघी आदि का शरीर इतनी सुरक्षा के बाबजुद भी गया..

🌷माया रख कर भी क्या करना ..कुछ नहीं है तो भी मस्ती में चलो..राजा ने नींद करने को दस

हजार दिये तो लड़के को नींद नहीं आई..तो वापस करके आया..बोला नहीं चाहिए..हमने आपको

नींद कराई..अपने नींद फीटा दी..

🌷बच्चा कुछ नहीं मांगता ..फिर भी उसको सब कुछ मिलता है.. ज्ञानी अपनी जरुरतें बहुत कम

कर देता है..इसलिएवो सबको ठुकरा देता है..

🌷राजा ने संत को शेरवानी दी..बोला तो अच्छी जुती भी चाहिए..फिर बोला धर भी चाहिए..तो

धरवाली भी चाहिए..फिर बच्चा भी होगा..को मर जाएगा तो रोना भी पड़ेगा..राजा बोला हाँ तो..फिर

रोने के लिए तुमसे जुती क्यों लुं..ज्ञानी माया का अंत दिखा देता है..

🌷ज्ञानी का उठना बैठना पढ़ना सब बदल जाता है..उसे सिर्फ गुरु की जरुरत रहती है..ओर गुरु

को तुमसे प्रेम है..उसे तुम्हारे घन दौलत कपड़ों से कोई प्रयोजन नहीं है..भगवान ने दुर्योघन का मेवा

छोड़कर साग विदुर धर खाया..उसे तुम्हारा भाव चाहिए बस..शबरी का भाव था कि राम कुटिया में

आऐ..तुम्हारा शरीर भी झोपड़ी है इसमें भगवान आ गया तो तुम्हारे भाग्य खुल जाएगें..

🌷जब अवतार आते है तो उनका संग करो..वक्त की क्रद करो..

🌷कबीर ने कहा कबीरा कुकर राम का मोतिया मेरा नाम ..बोला

क्या करुँ तेरी बैंकुड़ को जहाँ साघ संगती ना होए..ज्ञानी को बैंकुड़ की भी चाह नहीं है..

🌷जिस कर्म से शंति नहीं मिलती वो कर्म भी बेकार है..घिक्कार है उस कर्म को जिससे शांत न हो

मन..संसार में मन को जहाँ सुख मिलता है वहाँ प्रेम करता है..उनसे मोह हो जाता है..

🌷भगवान का शुक्रराना हर हालत में गाओ..किसी भी हालत में शुक्रराना मत भुलो..

🌷किसी के प्रति तुम्हारे मन में द्वैष है तो वहाँ भी भाव पहुँचेगे..गुरु बार बार कहता है भगवत भाव

रखो है ही भगवान..हम एक छोटे से धर में भगवान नहीं देख सकते..

🌷दादा के धर में जगह की कमी पड़ी को खुद बालकोनी में सो जाता था..शाम को खिचड़ी दुध से

काम चला लेता था..दादा पुनवानी एक सफेद साड़ी पहनती थी ..एक नाक की लोंग भी उनके पास

में नही थी..उनके मुख से हर समय वाह वाह निकलती थी..हड्डी टुटी ..टांग टुट गई बोली वाह..फिर

एक ठीक हुई ..दुसरी टुट गई..तो बोली वाह..हमेशा वाह वाह करती थी..अपने आप अपने कपड़ेे

सिलती थी..साड़ी फट जाती थी तो रफु कर लेती थी..फिर बहु देखती थी तो ओर लाकर रख जाती

थी..आया रखी थी कभी सेवा करती थी कभी नही ..पर दादी के मुख से कभी शिकायत नहीं

निकलती थी..दादा अपनी कमीज का कलर पलटवा कर पहन लेते थे..जब फट जाती थी..दादा के

पास एक बैग था..उसमें दो कपड़े थे..उसमें कुछ जरुरत का सामान रख कर आ जाते थे..कुछ भी

संग्रह नहीं किया उन्होंने..कहते थे रहो अमीर की तरह मरो गरीब की तरह..ज्ञानी शाहनशाहा होकर

होकर रहता है..

🌷इंसान इंसान है अगर वो अपनी इच्छाएँ छोड़ दे..🌿🌹🌿🌹🌿🌹

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