divine geeta bhagwan

Guru vaani 31 March 2019

  • पेड़ पत्थर मारने पर भी फल देता है। हम क्यों विरोध मे आ जाते है।
  • नदी का पानी नुकीले पत्थरो को भी लिस्सा कर देता है। पानी की तासीर ही यही है। कारीगर लकड़ी को फर्नीचर बना देता है। मेरे जीवन में भी वो कला विकसित हो। वो गुरु के मार्गदर्शन से होगा।
  • सत्संग का मतलब जो सच से हमारा कनेक्शन कर दे। सच जूठ का ज्ञान करवा दे। मेरी गलती ही मुझे डराती है। मेरी अपरिपक्वता की वजह से। जूठ और सच गुरु के साथ बैठ के समझना पड़ेगा।
  • जड़ वस्तूए भी बात करती है। जब हम अंतर्मुखी हो जाएंगे तो इनकी बाते भी समझ आएंगी। हमारे अंदर सच और जूठ मिक्स है। प्रकृति में pure सच है। कोई मिक्सिंग नहीं है। मनुष्य कहीं भी बैठता है तो वैसा ही हो जाता है। दृढ़ निश्चय में रहो। कोई हमें अपने स्वरूप से जुदा ना कर पाए।
  • इस संसार में हर जीव और हर वस्तु जैसे परमात्मा की श्वास है। एक को भी मैने तकलीफ पहुंचाई तो मुझे चैन नहीं आएगा। गुरु अर्जुन देव जी कहते थे कि गुरु से भी बड़ी है संगत। संगत मतलब पूरा संग। पूरी फैमिली भी मेरी संगत है।
  • सबकी तारीफ करो। अहंकार जाएगा दूसरों को तारीफ से। सबकी भूले देख देख के हम खुद भूलो का भंडार हो गए है। जिस तरह के व्यवहार की उम्मीद तुम दूसरों से करते हो, वैसा व्यवहार तुम सबसे करो।
  • एक गाय भी 50-100 का चारा खाती है, तो 1000 का दूध देती है। पर मनुष्य ऐसा है कि परमात्मा के सृष्टि का इतना माल खा लेता है पर शुक्राने एक भी नहीं। सबके शुक्राने करो। इतनी मेहनत से खाना बनता है, उसके शुक्राने करते हो? बनाने वाले के शुक्राने करते हो? सबके शुक्राने जरूर हो।
  • मेरे खुदके दोनों पैर एक साइज के नहीं है, और मुझे पता ही नहीं चलता है। पर किसी का एक खयाल अलग होता है तो अटक जाते है। क्युकी मैने माना है कि ये अपना है और वो दूसरा है।
divine geeta bhagwan

सबके शुक्राने बेहिसाब करो

हरी🕉

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