guru vaani 4 april

Guru vaani 4 April 2019

💜 पहले ही दिन गुरु कहते हैं कि तुम अपने को मानो या न मानो तुम स्वयं भगवान हो. लेकिन हम लोग समझाते हैं कि मैं तो इतना गन्दा मंदा हूँ और मैं कैसे भगवान हो सकता हूं लेकिन फिर भी गुरु विश्वास दिलाता है कि तुम भगवान हो.

जैसे हमारे सब के नीचे पानी है पाताल में खुदायी करेंगे तो पानी जरूर प्रगट हो जाएगा चाहे 150 फीट हो, या 200 फिट बाद मिलेगा जरूर. इसी तरह गुरु हमारे मन के अंदर बोरिंग कर देता है और मन हल्का हो जाता है. 💞

divine dada bhagwan


💜 यहां सत्संग में रहने पर भी हमको किसी के ऊपर भी ध्यान नहीं देना चाहिए जो गुरु वाणी चल रही है उसके ऊपर पक्का ध्यान रखना चाहिए और इधर उधर नहीं देखना चाहिए चाहे अगल बगल में कोई भी कुछ भी करम कर रहा हो हमको अपना ध्यान केंद्रित गुरु की महिमा mein रखना चाहिए तभी मन साफ हो जाएगा और हमारे अंदर से भगवान प्रगट हो जाएगा.

गुरु के ग्यान को मन मना भाव से ध्यान में रखते हुए sunna चाहिए और धीरज से सब कुछ कार्य करना चाहिए. जब तक हम अपने अंदर पक्का विश्वास और आस्था तथा निश्चय नहीं करेंगे तब तक हमारी स्थिति नहीं बनेगी.

इसलिए गुरु के ग्यान को तेल धारा की तरह एकाग्र चित्त से श्रवण करना चाहिए और फिर मनन करना चाहिए तब हमारा जीवन सुधर जाएगा. करत करत अभ्यास के जड़मत होए सुजान. कभी भी घबराना नहीं चाहिए कि हमारा जीवन सुधर नहीं पा रहा है सब कुछ समय आने पर ठीक हो जाएगा 💜 💜

🎤🎼BHAJAN 🎼🎤🎤

गुरु जी ने बताया कि,,,,,,


🎍नींद से जागने के बाद मुँह धोते है ना,,,ऐसे ही अज्ञान की नींद से जागकर ज्ञान की गंगा से मुँह धोले ,ज्ञान की गंगा में नहालें,,, मतलब ज्ञानमय जीवन हो जाएं,,,,,,,।


🎍क्रोध ऐसी अग्नि है जो पहले खुद को बाद में दुसरो को जला देती है,,क्रोध कब आता है जब कोई हमारे हिसाब से नही चलता,,लेकिन यहाँ गुरु खुद को सबके साथ एडजस्ट करना सिखाते है,,,,,,,।


🎍खुद से कोई गलती होती है तो खुदको कभी मारते हो ?,न ही न जब खुद को माफ कर देते है तो दूसरों को भी माफ करना सीखें,,,,,,।


🎍जैसे कहीं सफर में जाते है तो अपने बैग में जरूरी सामान रखते है ना,जैसे दवाई,पैसे,खाना, पीना ,,ऐसे ही जीवन के,,, मन के आत्मा तक पहुँचने के सफर में ज्ञान के गुरु के वचनों को अपने पास हमेशा रखें,,,।


🎍जैसे पानी का बहाव निचे की तरफ ही जाता है, लेकिन जब पानी को ऊपर चढ़ाना होता है,,तो टिल्लू से ऊपर चढ़ाते है तो चढ़ता है,ऐसे ही मन का स्वभाव नीचे गिरना है उसको प्रभु में लगाने के लिए ज्ञान के वचनों को टिल्लू लगा ले,,,,,,,।


🎍बुरी बातें मन जल्दी पकड़ता है,,,अच्छी बातें मन को सिखानी पड़ती है,,,तो थोड़ी महेनत खुद के लिये भी करें,,,,,,,,।


🎍किसी को किसी की गलती की वजह से समझाना हो तो तब समझायें जब वो शांत हो,,,,,गुस्से में समजगाएँगे तो आग में घी का काम करेगा,,,,ज्ञान तो क्रोध में पानी का काम करता हैं,,,,,,,,।


🎍शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ,,,,,,,,,।


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