Guru vaani 4 Sept 2019

Guru vaani 4 Sept 2019

ज्ञानी हर बात में सम रहता है..उसके लिए कुछ भी उचित अनुचित नहीं है..

सोचेया सोच न होई जे सोचे लख बार..ज्ञानी हुकुम में राजी रहता है..


ज्ञानी को कोई भी चीज छोड़ने में देर नहीं लगती..

बाहर से वो किसी पर आघरित नहीं है..मुझे मेरी मस्ती कहाँ लेके आई..

जहाँ मेरे अपने सिवा कुछ नहीं है..सबना जिंया का एको घाता सो मैंनु बिसर न जाए..


तुम जहाँ तहाँ भगवान देखो..तुम्हारा अपने में विश्वास होना चीहिए..

कर्म भी ज्ञानी के गहने हैं चाहे वो पहन कर चले या लॉकर मे रखे..

अगर कभी चला भी जाता है तो भी नहीं सोचना है..सो सहिब चिंता करे जिस उपाया जग..

जिसने जन्म दिया है वो चिंता करे.. ज्ञानी की कोई प्रंशासा करे या निंदा वो हर बात मे उपराम रहता है..

ज्ञानी हर हालत में शांत है..उठत बैठत सोवत जगत ये मन तुझे चितावे..

ज्ञानी को शब्द नहीं लगते गुरु के पास चाकर बनकर रहता है..

पैसा लेकर सेवा करे वो तो नौकर होता है..उसका सेवा भाव होता है..

तुमसे किसी प्रकार की चाह नहीं है..प्रेम में सेवा होे जाती है..

उसका करने का कोई भाव भी नहीं होेता..जो हो गया वोे बहुत अच्छा है..

कोई अगर पानी का गिलास भी स्वीकार करता है तो शुक्र मनाओ..


जो भगवान का सेवक बनकर रहता है..उसको बाहर की तनखाह नहीं मिलती है..

पर अंदर का आंनद मिलता है..आप जिनके करीब होते हैं वे बड़े खुशनसीब होते हैं पर परमात्मा प्रेम के बिना नहीं मिलता..


तुम संसार के प्रेम में फंस जाते हो..तो मोह बन जाता है..

विवाह में आह क्यों निकलती है..वाह क्यों नहीं करते..अग्नि के साक्षी बनाकर विवाह करते हो..

ताकि टुटे नहीं..कोर्ट मैरिज भी कर सकते थे..


फंस के तु मोह में भुला तु अपना करार है..

बच्चा पैदा होता है ॐ ॐ करके पर संसार में आके भुल जाता है..

सबके प्यार की इच्छा होती है ..तुम खुद दातार बन जाओ..

तुम क्यों भिखारी बन जाते हो..ज्ञानी सकल के मघ्य सकल से उदास..इसलिए उसने सकंल्प विकल्प सब छोड़ दिए हैं..


जीव माने सुख का कीड़ा..तुमको जहाँ से आंनद मिलता है वहाँ अटक जाते हो..

खुद आंनद स्वरुप होके दुसरो में अटक जाते हो..

जगत के पदार्थ अपने में अटक देते हैं..जैसे फिटकरी से फाड़ देते हैं जैसे तुम्हारे दिल फटे हुए होेते हैं..

पर ज्ञानी हर बात में सम रहता है..


परिवार में उतार चढ़ाव तो आते ही हैं ..

ज्ञानी के ऊपर संसार के उतार चढ़ाव का असर नहीं पड़ता..वो हर बात में सम है..

तुम किसी की सेवा करने में नौकर नहीं हो जाओगे..


डाक्टर बाहर डाक्टर है पर माँ की सेवा तो बेटा बनकर करता है..तो ज्ञानी को सेवा करने में आंनद आता है..

ज्ञानी किसी के काम करके नहीं दिखाता है..

मंदा किस नु आखें जब है ही करतार..ज्ञानी सबको अपना आप जान कर प्यार करता है..

जितने विकार है सब दुसरे से हैं..अगर किसी को दुसरा नहीं देखा.. तो कोई विकार नहीं..क्योंकि सब है ही भगवान..🌿🌹🌿🌹🌿

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