Guru vaani 7 Nov 2019

Guru vaani 7 Nov 2019

जय गुरुदेव

(“जब मन मर गया तो फिर क्या करना है,जीने के लोए सब संसार है,मरने के लिए कुछ नही।

*मुर्दा क्या चाहत करेगा,मुर्दा का क्या मान अपमान होगा,मुर्दे पर हार फूल चढ़ाओ,तो भी खुश नही होगा।

*जीते हो,तो कुछ न कुछ करना है,मर गए,तो क्या करना।

*राजा हरिश्चन्द्र शमशान में मसाडी बन गया,उसकी पत्नी किसी के घर मे नौकरानी बन गयी,बेटा मर गया,उसके लिए कफ़न तक नही था,तो सारी फाड़ कर दी,और अपना फर्ज निभाया।

*भगवान अपने भगत को 3 टोल देता है,दुख गरीबी निंदा,इससे ज्यादा क्या देगा।

*भक्त हर बात में भलाई समझता है,भक्त बनना है,तो हर बात के लिए तैयार हो जाओ।

*दुख भगत सुदामा को भी आया,खाने के लिए भी घर मे नही होता था,भगवान की भक्ति करता था,एक दिन पत्नी ने कहा,भगवान से मांग कर आओ,बच्चे भूखे है,तो जाने को तैयार नही हुआ,बड़ी मुश्किल से माना, और बोला,खाली हाथ कैसे जाएं,तो पत्नी पड़ोसी के यहॉ से चावल की कनकी मांग कर लाया,,उसे भेंट स्वरूप लेकर गया,,भगवान ने 2 मुट्ठी खाकर 2 लोक दे दिए,तीसरी मुट्ठी खाने लगे तो रुक्मणी ने हाथ पकड़ लिया,बोली कुछ रखोगे अपने लिए,रहोंगे कहा।

*एक झूठ की सजा मिली उसको,की वो कृष्ण के हिस्से के चने झूठ बोल कर कहा गया,बोला,दांत किटकिटा रहे है सर्दी से।

*किसी का हिस्सा नही मारना चाहिए, वार्ना सजा तो मिलती ही है।

*सबको अपने अपने कर्मो का हिसाब चुकाना पड़ता है।

*जिंदगी में तुम्हारे बहुत से एपिसोड हो चुके है,पता नही कौन क्या क्या कर्म करके आया है,तुम्हे नही पता।
और तुम रोते हो,की हमारे साथ कैसे हुआ?….

जो भी जिसको मिल रहा है,उसको कर्मो का हिसाब किताब समझ कर खुशी से चुकता करो,,

पर अपनी भक्ति नही छोड़ो,दर्द को भी इनाम संमझो,अपने प्यारे के हाथों से मिला है,तेरा भाना मीठा लागे,

जो तोड़ भावे,साईं भली कार,,,, कौन कहे साहिब को,यूं कर,यूं न कर,,जीवन मे स्वीकार भाव सबसे बड़ी भक्ति है।))

नमन प्यारे गुरुवर को,,हरि ॐ जी🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹

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