ज्ञानी का हर पल हाथ काम मे और मन राम में रहता है

ज्ञानी का हर पल हाथ काम मे और मन राम में रहता है

गुरु जी ने बताया कि

🌻क्यों व्यर्थ चिंता करते हो ?,,,, संसार इतनी विकट परिस्थिति से गुजर रहा है,,,,,फिर भी प्रभु की कृपा से खाना पीना घर पर ही मिल रहा है ।

🌻हर बात के शुक्राने मानते चले,,,शुक्र मनाओ की बाथरूम जा पा रहे है,, उनसे पूछो जो नही जा पा रहे है,,,,इस लिये हर पल शुक्र मनाते रहें ।

🌻कोई जूतों के लिए परेशान होते है कि मेरे पास नए जूते नही, कोई हाथ पैर सही सलामत है उसके शुक्राने मनाता है ।

divine pramila bhagwan
divine pramila bhagwan

🌻किसी ने गुरु से पूछा आप तो स्वयंम भगवान हो आप किसके शुक्राने मानते हो ?,,,,तो बताया कि मैं प्रकृति का शुकराना मानता हूं, जो हर पल सेवा में रहती है,, हर कार्य अपने आप हो रहा है ।

🌻ज्ञानी का हाथ हर पल हाथ काम मे और मन राम में रहता है ।

🌻प्रभु के शुक्राने मान ना नम्रता की निशानी है ।

🌻ज्ञानी नायलॉन के मोजे की तरह होता है, नायलॉन का मोजा हर पैर में एडजस्ट हो जाता है,,,, ऐसे ही ज्ञानी भी सबके साथ एडजस्ट करके खुश रहता है ।

🌻शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ ।


Divine Guru ji vaani Satsang

शेर का औलाद तू शेर है। अर्जुन की तरह गीदी और
कायरता की बातें तुम्हारे मुँह पर शोभा नहीं देती हैं। तुम
आज ही आज़ाद आत्मा हो। आकाश कोई नहीं बाँध
सकता है। तुम अपना स्वरूप पहचानो। फलानी बनकर
तुमने पत्र लिखा है पर आत्मा होकर नहीं। न तुम हो न
घर वाले हैं। है ही भगवान। सब तुम्हारी दृष्टि पर आध
रित है। जैसे दृष्टि वैसी सृष्टि। तुम अपने जीवन पर
आशिक हो जाओ कि मेरे जैसा न कोई हुआ न होगा।


भगवान ने जहाँ जिस हालत में हमें रखा है वहाँ से ही
अपनी परीक्षा (आजमाईश) देकर ऊपर चढ़े। दूसरों से रीस
नहीं करनी है न ही किसी भी बात में अपने को कमज़ोर
करके पछुताना है। आशावादी होकर हर बात से अपना
फायदा लेना है। भक्त के पास गाय थी तो दूध मलाई
खाता था यदि गाय चोरी हो गयी तो गोबर उठाने से छूट
गया। दोनों हालतों में ज्ञानी समान है। बाहर की कोई भी
हालत कोई भी बंधन तुम्हें अपनी मुक्ती से दूर नहीं कर
सकता।

पूरन गुरू खुद भगवान हमें मिल गया है तो अब
ऐसी कौन सी मुश्किल बात है जो नहीं हो सकती है।
Impossible को Possible करने वाला गुरू है जिसने
हजारो लोगों को मन चाहे तन की आजादी लेकर दी है,
वह बाकी तुम्हें नहीं तार सकता है क्या

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