ज्ञानी का जीवन मीठा और रसमय होता है

ज्ञानी का जीवन मीठा और रसमय होता है

गुरु जी ने बताया कि

🍄जरा से दुख से क्यों दुखी हो रहे हो हमारे जीवन मे सीता मीरा ,जैसे दुख तो नही न,,,,,,,,,,,,।

🍄मीरा को ज़हर का प्याला भेजा गया ,उन्होंने उसमे अमृत का भाव डाला,तो वो अमृत बन गया ,हम भी अपने शुद्ध भाव से सबके गलत भाव को अच्छे भाव मे बदल सकते है,,,,,,,,,,,,,।

🍄प्रभु ने जितना भी दिया है उसको उठाने के काबिल नही थे,,,जिसने भी जो भी दिया है उसके लिए उनके शुक्र गुजार रहें,,,,,,,,,,,,,।

🍄ज्ञानी का जीवन मीठा और रसमय होता है,,,,,,,,,,,,,,।

🍄अपने स्वभाव से अपने जीवन को स्वर्ग बनाएं,,,,,,,,,,,,,।

🍄लोहे को पानी मे डालकर रखो तो जैसा होता है वैसा ही रहता है,,,,भट्ठी में डालो तो पिघलता है,,लोहा क्या है,,,” मैं ” मैं भी इतनी जल्दी नही गलती ,ज्ञान की भट्ठी में डालेंगे तो ” मैं ” गल जाएगी,,,,,,,,,,,,,।

🍄गुरु के सानिध्य में अहंकार गलता है, ,,,,गुरु हमारी ” मैं ” को मिटा ते है,,,,,,,,,,,,,।

🍄गुरु को पीठ ना दिखाना मतलब गुरु कहे वैसा ही करना,,,,,मान न,,,” गुरु के शब्दों को मान देना होता है,,,,,,,,,,।

🍄गुरु ने ” लहणे ” शिष्य को कहा मुर्दा खाओ,वो खाने लगा तो देखा थाली में कणाव प्रशाद था,,,मुर्दा नही था,,हम गुरु की बात माने तो,,,,,,,,,,,,।

सबसे बड़ा निष्काम रोते हुए को हसाना, टूटे हुए दिल को जोड़ना होता है

🍄हर बात में कहे ” मैं ” कुछ नही प्रभु ” तू ही तू ” है,,,,,,,,,,,,,।

🍄शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ,,,,,,,,,,,,,

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