जो सबसे अच्छा तैराक होता है अक्सर वही डूबता है

जो सबसे अच्छा तैराक होता है अक्सर वही डूबता है

🕉️ ज्ञानी अकर्ता भाव से कार्य करता है वह निमित्त मात्र है कराने वाला परमात्मा है।

🕉️ जब हम स्वय से ध्यान हटाकर दूसरे पर ध्यान देने लगते हैं तो हमसे गलतियां होने लगती है

🕉️ दुर्घटना हमेशा हाइवे पर होती है क्योंकि खाली रोड देखकर तुम निश्चिंत होकर असावधानी पूर्वक गाड़ी चलाने लगते हो।

🕉️ जो सावधान होते हैं उसकी जेब नहीं कटती, ऐसी स्थिति में तुम कभी असफल नहीं होते।

🕉️ जो सबसे अच्छा तैराक होता है अक्सर वही डूबता है क्योंकि उसके अंदर I know की असावधानी होती है।

🕉️ किसी भी कार्य को पूर्ण तन्मयता से, लगन से, जोश से पूरा कीजिए तो आपको हर कार्य में सफलता मिलेगी।

🕉️ ज्ञानी कभी नहीं हारता क्योंकि उसका मन , चित्त स्थिर है।

🕉️ जब हमारे अंदर कोई इच्छा नहीं है तो भीतर में हलचल भी नहीं होगा।

🕉️ अपने इन्द्रियो के मालिक बन जाए फिर जैसे हम चाहेंगे वैसे ही चलेंगे।

🕉️ ज्ञानी हर समय ध्यानस्थ रहता है उसका शरीर तो संसार में रहता है पर मन हमेशा परमात्मा के चिंतन में रहता है।

🕉️ जैसे पानी का स्वरुप स्थिर है लेकिन कंकड़ मारने पर अस्थिर हो जाता है ऐसे ही हमारा भी चित्त शांत स्वरुप है इच्छाओं चाहनाओ का कंकड़ इसे अशांत अस्थिर कर देता है।

🕉️ चित्त की स्थिरता के लिए जरूरी है कि हम गुरु का सानिध्य करें तब हमारे अंदर स्थिरता आएगी।

जो सही रास्ते पर चलता है उसको शेर का डर नहीं रहता
जो सही रास्ते पर चलता है उसको शेर का डर नहीं रहता

🕉️ गुरु Paper weight के समान है जो अपने ज्ञान के वचनों से हमारे मन को शांत, स्थिर , हलचल रहित कर देते हैं।

🕉️ जब हम स्वय को जानेंगे कि हम आत्मस्वरुप है तो हम इच्छाओं, चाहनाओ से मुक्त हो जाएंगे।

🕉️ सत्संग में आने पर गुरू जी के वचनों को अपने जीवन में लगाने से हमारे अंदर स्थिरता आती है।

🕉️ हमारे चित्त शांत रहे इसके लिए वैराग्य और स्थिरता बहुत जरूरी है, सत्संग में बैठकर, ज्ञान को सुनकर, धीरे धीरे हमारा मन शांत होता है इसलिए हमारे जीवन में सच्चे गुरु का साथ बहुत जरूरी है।

बहुत शुक्राने है गुरू जी के

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