खुद का दर्शन ही आत्म दर्शन है

खुद का दर्शन ही आत्म दर्शन है

हमारा एक ही सवाल होता है के आत्मा का दर्शन कैसे करें गुरु हमे यही समझाता है

आत्मा कोई वस्तु नहीं जो दिखेगी ये अनुभव है तुम जब तक शरीर में अटके हो तो आत्मा से दूर हो तुम शरीर रूपी कपड़ा उतारकर ज्ञान रूपी गंगा में नहाके ही आत्मा का दर्शन कर सकते हो ।

हम देखते है तो वो शक्ति कौनसी है जिस कारण में देख सकता हूं गुरु उस शक्ति का दर्शन करवाता है सब चीज नश्वर है सुई जहां गिरी है

वहीं मिलेगी रोशनी बाहर नहीं अंदर करनी है

गुरु हमे आत्मा की पहेचान करवाता है खुद का दर्शन ही आत्म दर्शन है

एक भी वैरी है तो जनम मरण निश्चित है पुरुषार्थ करो पुरुषार्थ किसी का वेस्ट नहीं जाता सब अपनी मेहनत है खुदी जायगी तो ही खुदा होंग ।

सबसे बड़ा निष्काम रोते हुए को हसाना, टूटे हुए दिल को जोड़ना होता है

तत्व को पकड़ने से बात बनेगी जैसे पेड़ में फल हो तो हमारी नजर सीधी फल पर जाती है

यानी तत्व पर तकलीफ ये है कि हम जीवन से कुछ सीखते नहीं हमे अभी भूख नहीं है वरना पूरी प्रकृति से हम सीख सकते है बस स्वीकार भव रखना है ।

जैसे फानूस का काच साफ करो तो रोशनी दिखती है ज्योत तो अंदर पहले से है वैसे गुरु हमारी सफाई करता है हम गुरु का संग नहीं छोड़ेंगे तो गुरु हमे निराचित बनाएगा .

🌹हरी ओम 🌹

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