किसी को सुख मिले ऐसा बोले

गुरु जी ने बताया कि

🍃दुसरो के कर्मो में नहीं जाना है,किसी को क्या मिला,किसने क्या दिया हमे क्या मतलब ,सिर्फ अपने कर्मो की सावधानी रखें ।

🍃जहां जरूरी हो वहीं बोलो,,कोई लाख रुपये दे तब भी सोचकर बोलो,,,ब्रह्मज्ञानी के एक एक शब्द का मोल होता है ,उसे यू ही व्यर्थ ना गवाएं ।

🍃बड़े, बड़े संत महात्माओ पर किताबे लिखी गई,हमारे ऊपर भी कुछ अच्छा लिखा जाएं ऐसे कर्म होने चाहिए ।

🍃अपनी इन्क्वाइरी करें पूरे दिन बोलते रहते है, किसी को सुख मिले ऐसा बोले,, वरना मौन रहें ।

🍃किसी ने पूछा कि चरित्र बड़ा की ज्ञान बड़ा ?,,,तो बताया कि चरित्र ,,,,,क्योंकि चरित्र होगा तभी ज्ञान टिकेगा ।

🍃अपने मन की और शरीर की शक्ति को बचाओ ,इधर उधर की बातों में ना गवाओं ।

🍃माया तो अपनी माला लेकर खड़ी है कि जहां हम झुके वहीं माला पहना देगी,,,लेकिन गुरु ज्ञान से खुद को इतना ऊपर उठा लो कि माया हम तक पहुँच ना पाएं ।

🍃दो शब्द से ” महाभारत ” बनी, दो शब्द से ” रामायण ” बनी,,,,हम सोचे हम सुबह से कितना व्यर्थ बोलते है ।

🍃शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ ।

मन की आंखें सच देखती है

🎍जीवन को अगर रंगमंच समझेंगे तो मन को दुख नही होगा ।

🎍अपनी हर सुख दुख की बात प्रभु से कहें ।

🎍किसी के भी आने, जाने से दुखी मत होइए ,कोई आएं ” वेलकम ” ना आये ” बाय बाय ” ।

🎍कर्म का अहम करेंगे तो भारी हो जाएंगे ,ज्ञान से हल्के हो जाएं ।

🎍मुख की आंखें कर्म देखती है,मन की आंखें सच देखती है ।

🎍कोई गाली दे गुस्सा करें तो शुक्र मनाओ की प्रभु ने हमे वैसा नही बनाया ।

🎍एक छोटीसी चाह भी हमे प्रभु से दूर करती है ।

🎍गुरु कहते है कि अगर चाहना हमारे अंदर ना हो तो हम पूर्ण ब्रह्म है ।

🎍व्यर्थ की बातों के लिए मन को ” नो ” करें,,गुरु को ” यस ” करें ।

🎍शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ ।

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