मन

मन के साथ साथ तन को भी व्यस्त रखना है

गुरु जी ने बताया कि

आज जो संसार मे कहर दिख रहा है, उसमे भी भलाई छुपी है, पाप का अंत हो रहा है,

धर्म की स्थापना हो रही है, दिखने में कहर है लेकिन इसमें भी प्रभु की महेर छुपी है,,,,,,,,,,,।

मन के साथ साथ तन को भी व्यस्त रखना है, ताकि मन और तन में जंक ना लग जाएं,,,,,,,,,,।

ज्ञान की राह में आलसी नही होना है, हर कार्य अपने नियम से करने है,,,,,,,,,,,।

अकेले में विसय विकार का चिंतन नही करना है, हर समय खुद के साथ साकार और निराकार प्रभु को महेसुस करना है,,,,,,,,,,,।

ज्ञानी का ना किसी से वैर होता है ना किसी से द्वेष होता है, उसका सर्व से निश्छल प्रेम होता है,,,,,,,,,,,।
ज्ञानी का जीवन निस्वार्थ जीवन होता है,,,,,,,,,,,।

जो माया में सोया हुआ है वो अज्ञानी है, जो आत्म स्थिति में जागा हुआ है, वो ज्ञानी होता है,,,,,,,,,,।

भक्त अपने भगवान के बिना रह ही नही सकता,, जैसे श्री राम के साथ लक्ष्मण भी वन में चले गए,,,,,,,,,,,,।

शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ,,,,,,,,,,,,,।

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