नील अर्म स्ट्रॉन्ग

नील अर्म स्ट्रॉन्ग ने चाँद पर से जो फोटो खींची थी, उनमें तारे क्यों नहीं दिखाई देते?

जब 21 जुलाई 1969 को अपोलो 11 नामक अंतरिक्ष यान चांद की कक्षा में पहुंचा और उससे

ईगल नाम का छोटा यान अलग हुआ, तब सबसे पहले नील आर्म स्ट्रॉन्ग ने चांद की सतह पर कदम

रखा, उसके बाद बज एल्ड्रिन ने तब अपोलो यान पर बैठे रहे माईकल कॉलिंस जो वहीं चांद की

नील अर्म स्ट्रॉन्ग

कक्षा में घूमते रहे, नील और बज़ ईगल यान से चांद की सतह पर उतरे और नील ने बज और

आसपास की काफी फोटो खींची। परन्तु उन में से किसी भी फोटो में आश्चर्य जनक रूप से तारे

दिखाई नहीं दे रहे हैं बल्कि काला और स्याह आसमान दिखाई दे रहा है।

ईगल नाम का छोटा यान अलग हुआ, तब सबसे पहले नील आर्म स्ट्रॉन्ग ने चांद की सतह पर कदम

रखा, उसके बाद बज एल्ड्रिन ने तब अपोलो यान पर बैठे रहे माईकल कॉलिंस जो वहीं चांद की

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कक्षा में घूमते रहे, नील और बज़ ईगल यान से चांद की सतह पर उतरे और नील ने बज और

आसपास की काफी फोटो खींची। परन्तु उन में से किसी भी फोटो में आश्चर्य जनक रूप से तारे

दिखाई नहीं दे रहे हैं बल्कि काला और स्याह आसमान दिखाई दे रहा है।

इसी कारण बहुत से लोग नासा के इस चांद के इस मिशन को फर्जी मानते हैं।

परन्तु इसका कारण कुछ और ही है, आइए इस तथ्य की पड़ताल करते हैं और पता लगाते हैं कि,

आखिर चांद से फोटो में तारे क्यों नहीं दिखाई देते हैं?

रोचक बात यह है कि चांद पर एक तरफ पृथ्वी के 13.5 दिन के बराबर दिन और 13.5 दिन के

बराबर रात होती है क्योंकि सूर्य का प्रकाश इतनी अवधि के लिए ही चांद के दोनों हिस्सों पर गिरता

है। अब देखिए यूं तो नील और बज जब चांद की सतह पर उतरे उस समय वहां दिन की स्थिति थी

क्योंकि सूर्य सतह के उस भाग पर प्रकाश डाल रहा था।

अब देखिए पृथ्वी की तरह चांद पर वायुमंडल और वातावरण तो है नहीं इसीलिए प्रकाश का

प्रकीर्णन नहीं हो पाता है और हमें वहां आकाश काला ही दिखाई देता है। ऐसे में तो हमे हमेशा तारे

दिखाई देने चाहिए परन्तु अपोलो मिशन में तारों की फोटो ना होना इसके पीछे दरअसल कैमरे का

कारण है।

नील अर्म स्ट्रॉन्ग :

हम जानते हैं कि कैमरे से फोटो खींचने के लिए प्रकाश की आवश्यकता होती है और जब हम किसी वस्तु को फोकस करके फोटो खींचते हैं तो उससे दूर की फोटो बहुत धुंधली आती है।

क्योंकि ऐसी स्थिति में कैमरा प्रकाश के लिए ज्यादा संवेदनशील नहीं होता है और वैसे भी तारे इतनी दूर हैं कि इनसे प्रकाश की बहुत कम मात्रा हम तक पहुंच पाती है।

यही कारण है कि जब नील ने फोटो खींची तो उन्होंने चांद पर उपस्थित वस्तुओं पर और बज पर ही फोकस किया साथ ही उस समय कैमरे इतने सशक्त नहीं थे कि वे तारों से आने वाले प्रकाश के आधार पर उनकी तस्वीर के सकें।

साथ ही चांद पर वायुमंडल का ना होना भी इसका एक कारण हो सकता है।

अतः मूलभूत रूप से तारों की फोटो ना आने का यही कारण दिखाई देता है।

अब देखते हैं शायद अगली बार चांद पर जब कोई मानव मिशन जाए तो वो इस बात पर गौर करें और तारों की भी फोटो के सकें।

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