प्रभु

माया में नही प्रभु में अपना मन रखना है

गुरु जी ने बताया कि

🌸आरती में बोलते है कि ” तन मन धन ” तेरा क्या लागे मेरा,,फिर क्यों बोलते हो कि तन में तकलीफ है,मन दुखी है, धन चाहिए,,,,,, जब सब भगवान का है तो परेशान क्यों होते हो ?

🌸अपने ही घर मे महेमान की तरह रहो कौन क्या कर रहा है उसमें मत जाओ अपने मन की शांति के लिए

🌸आत्म ज्ञान से हमारा जीवन सरल रहता है, सुख दुःख लगता नही ।

🌸हम अपमान से नही बच सकते, लेकिन ज्ञान की ढाल लगाकर अपमानित होने से बच सकते है ।

🌸हालतें तो अंत तक आएगी ,हम बस हालात का रूप ना बन जाएं ।

🌸मक्खन को वापस दही में डालेंगे तो दही का रूप बन जायेगा,,,,,अलग रखेंगे फ्रिज में तो सही रहेगा,

ऐसे ही जब हम मन से पक्के हो गए है तो वापस माया में ना जाये ।

🌸माया में रस लेंगे तो रस्सियां तैयार हो जाएगी ,,माया में नही प्रभु में अपना मन रखना है ।

🌸अगर सागर में लहरें चलती है तो हाथी एक तरफ बहता जाता है,,,

लेकिन मछली हल्की फुल्की रहकर तैरती रहती है,

क्योंकि उसने अपने आपको पूर्ण सागर को समर्पित किया हुआ है,,,,,ऐसे ही हमे भी भगवान के आगे खुद को समर्पण कर देना है ।

🌸शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ ।

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