Guru vaani prem satguru

प्रेम में ना दूरी दिखती है ना देरी लगती है

🍃सहज होना एक हज के बराबर होता है,,,,,मतलब जो सहज और सरल होता है,,,,,

वो अपना जीवन तीर्थ की तरह व्यतीत करता है,,,,,,,,,,,।

🍃ई , सी, जी,,के टेस्ट में जब तक लाइन टेढ़ी मेढ़ी आती है तब समझो इंसान जिंदा है,,,,

अगर सीधी हो गई तो समझो जीवन खत्म,

तो हमारे जीवन मे भी टेढ़ी मेढ़ी परिस्थितियां आती है तो समझो अभी हम जिंदा है,,,,,,,,,,।

🍃अगर बाल्टी में मिट्टी हो तो बाल्टी को पानी के नल के नीचे रख दे ,

धीरे धीरे सब मिट्टी निकल जायेगी और पानी साफ हो जाएगा ,

ऐसे ही हमे खुद को भी सत्संग में बिठा देना है मन के विसय विकार धीरे धीरे ज्ञान के पानी से साफ हो जाएंगे,,,,,,,,,,,।

🍃जहां प्रेम होता है वहां कुछ भी गलत दिखता नही, 🍃जहां प्रेम गाढ़ा होता है वहां दोष दिखता नही,,,,,,,,,,।

🍃जहां दोष गाढ़ा होता है वहां प्रेम नही दिखता,,,,,,,,,।

🍃प्रेम में ना दूरी दिखती है ना देरी लगती है,,,,,,,,,,।

🍃शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ,,,,,,,,,,।

ये प्रेम तुम्हारी नस नस में पहुँच जाए

तुम्हारा देहाघ्यास बिना गुरु प्रेम के नहीं छु्टेगा..

ऐसा प्यार हो जाए कि में गुरु तेरे बिना रह नहीं सकता..इश्क की आग में जलना प्रेम में डुबे रहना..एक गुरु की ही चितवनां चले..

तुम्हारा प्यार इधर उधर बंट गया है पर कहीं ओर का प्यार सच्चा नहीं है..

मैंने देखी जग की प्रीत मित सब झुठे पड़ गए..जो चढ़ना सो इधर माने..जो होवना सो उधर पड़े..

सदा कुछ भी रहने वाला नहीं है..सदा ना संग सहेलियां सदा ना काला केश..सदा ना इस जग जीवना सदा ना राजा देश

divine dada shyam
divine dada shyam

प्रेम में तपस्या लगती ही नहीं है..

एक मिजाजी इश्क में लैला मंजनु को कोई हालत लगी नही..तो हकीकी इश्क में भी आशिक हंस हंस सुली चढ़ते हैं..

अनहक ने ना अल हक कना नहीं छोड़ा..बोला जो हक है वहीं कह रहा हुँ..

में कैसे छोड़ दुँ ओर हंसते हंसते सुली स्वीकार की खुन की घारा निकली तो खुन को मुख पर मल लिया कि कोई मैरा पीला मुख ना देखे

सुख के सब साथी दुख मे ना कोए..पत्नी बहुत प्राण प्यारी है..

क्योंकि उस से स्वार्थ पुरा होता है..पर ऐसे कोई बिमारी लग जाए तो छुते भी नहीं..दुर से पुछ लेतेे हो कैसी है..पर गुरु अंत तक प्यार करता है..

बुद्घ भगवान जा रहे थे साथ में आनंद पानी लेकर जा रहा था.. बुद्घ को रास्ते में एक पौंधा सुखा दिखा जो गर्मी से झुलस रहा था..

उन्होंने आनंद से पानी लेकर सारा पानी उसमें डाल दिया ।

आनंद ने कहा अब जब प्यास लगेगी तो क्या पियेंगे..

बोले हो सकता है प्यास लगे ही नहीं..पर अगर इस पौंधे में पानी नहीं डालते तो ये पाैंधा मर जाता..

तो ज्ञानी अपने लिए नहीं ओरों के लिए जीता है ।

उसको देकर सुख मिलता है..देने में जो खुशी मिलती है वो लेने में नहीं मिलती

किसी से प्रेम की भीख नहीं मांगो कितना भी मिल जाए पर संसार से तृप्ति नहीं मिलती पर गुरु हमें संतोष घन देता है जिससे तृप्ति आती है..हम प्रेम किए बिना रह ना सके…

ऐसी प्यास अंदर जागृत हो जाए पीओ रे प्रेम रस हैं कोई प्यासा..ये प्रेम तुम्हारी नस नस में पहुँच जाए..

भोजन तो बहुत खाया पर बिना हजम हुए ताकत नहीं देता है..

ये ज्ञान भी तुम्हारे अंदर हजम हो जाए..माया से इंकार आ जाए.. संसारिक पदार्थों की कामना ना रहे..

प्रेम से ही परमात्मा मिलता है

आहे प्रेम जिनखे मिले राम तिनखे..भगवान को बंटा हुई प्यार नहीं चाहिए..हमारा मन सारा दिन जगत की ओर भागता रहता है..जैसी भुख जगत के लिए है..

ऐसी परमात्मा के लिए हो जाए..सच्चे नाम की की लागे भुख ..

उस भुखे कहे चलिए दुख..बिना इस भोजन के तुम कमजोर ही बने रहोगे

जो हर समय नाम में मस्त रहता है..उसको खाना नहीं भी मिले को मस्त है..

सारा दिन दुनियाँ से डर डर कर मत जीओ ..तान के सीना चलो दुनियां तुम्हारी है..दुनियां के बाप हो दुनियां तुम्हारी है..क्या करेगी आखिर दुनियाँ..

मुल्य चुकाने से घबराओ नहीं..बिना मुल्य चुकाए संसार में कुछ नहीं मिलता..

भगवान भी बिना मुल्य चुकाए नहीं मिलेगा..

अगर तुम चाहते हो..कि कोई परीक्षा लगे नहीं को गुरु कि शरण पकड़ लो..

सोना आग में तपता है तो ही चमकता हीरे को भी तराशा जाता है..

प्रेम से परीक्षा स्वीकार करो..कदम पीछे मत हटाओ..लगन सदगुरु से लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा..उन्हें अपना बना बैठे जो होगा देखा जाएगा..🌿🌹🌿🌹🌿

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