रोना छोड़ दो

रोना छोड़ दो

गुरु जी ने बताया कि

🌿बच्चा अगर गलती करता है तो माँ उसको पनिशमेंट देती है,

ताकि, वो सुधर जाएं, ऎसे ही भगवान जी भी देखते है कि हम माया में लिप्त ना हो जाएं इसलिए विपरीत परिस्थिति भेजते है कि हम वापस प्रभु की तरफ मुड़ जाएं ।

🌿संसार का प्रेम कमजोर बनाता है, ,प्रभु का प्रेम ताकत देता है ।

🌿यदि कोई अकेला रोयेगा तो कोई पूछने नही आएगा क्यों रो रहे हो ?

पर अगर अकेला हँसेगा तो सब पूछने आएंगे भाई क्या हुआ क्यों हस रहे हो ?,, इसलिए रोना छोड़ दो

🌿बच्चे की पसंद का खाना, पीना, कपड़े देते हो बचपन से तो जीवन भी तो उसको उसकी पसंद का दे, मतलब खुद भी फ्री हो जाओ, सबको भी फ्री कर दो ।

🌿किसी के लिए भी गंदे , या गलत भाव ना लाएं ।

🌿जहाँ मन मे विक्षेपता आएं वहां से हट जाए ।

🌿ज्ञानी का मन राम में हाथ काम मे होता है ।

🌿बच्चा जब पैदा होता है तो उसकी नाल काटनी पड़ती है,,,,,,जो माँ से जुड़ी होती है, अब मन से मोह की नाल भी तो काटो ।

🌿शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ ।

सभी का पेट भर गया

तु प्यार का सागर है तेरी इक बूंद के प्यासे हम..तुम्हारे अंदर सब कुछ है..

ये तुम्हारे हाथ में है कि तुम क्या निकालते हो..विष निकले या अमृत निकले डुब कर थहा अपनी पा ले..तु है शिव तु है शिव का दुलारा..

दादा के पास कोई रोता हुआ आता था..तो हँसता हुआ जाता था..

कोई तुमसे उलटा चले तुम उससे भी सीघा चलो..मरे जो तुमको मुक्का पाए तीन चुमा..कोई आकर किसी की बुराई करे तो उसकी हाँ में हाँ मत मिलाओ..

तुम हर बात को अच्छा करके देखो..क्या बुरा क्या अच्छा ..तुम्हारा दृष्टिकोण सही होना चाहिए..तभी सुखी रहोगे ।

दादा जी ने बोला हर हालत शुक्राना मानने के योग्य है..

काले बादलों के बीच भी एक सिल्वर लाइन होती है..

भाग्य बड़े जब हरी सतगुरु बन जीवन में आ जाए..शुक्राने मानो जो ऐसा सतगुरु मिला है..जिसने धर बैठे जीवन बना दिया..

अपनी मैं को मारेंगे तब खुदा प्रकट हो जाएंगे
अपनी मैं को मारेंगे तब खुदा प्रकट हो जाएंगे

तुमको गुरु ऐसा पावर फुल बना देगा..कि तुम जहाँ भी रहोगे प्रेम की दुनियां बनाकर रखोगे..

हर वक्त मुस्कराते रहोगे तो गुस्सा नहीं कर पाओगे..मेरा मुस्कराता चेहरा रहेगा.. यही सब पर उपकार हो जाएगा..

हम अपने प्रेम का पंजा मारे की कठोर हृदय भी पानी हो जाए..

गुरु नानक ने पंजा लगाया तो पानी निकला..

हम अपने प्रेम से किसी की कठोरता मिटा सके..सबको प्यार करो खाओ खेलो..

एक बार एक राजा ने सबको दावत दी..पर हाथों में खप्पचियां बंघ दी..तो कैसे खाए..

तो युक्ति सुझी..हरेक ने अपने सामने वाले को खिलाया..सभी का पेट भर गया.🌿🌹🌿🌹🌿🌹

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