घर रहना है

आप सब को थोडे दिन के लिए घर रहना है।

💐पुज्य दादा भगवान जी अपने प्रदानमंत्री के विषय में कह रहे है।

हमारे प्रदानमंत्री जी देश के लिए कितनी कुर्बानी है।

दादा जी ः कितने दर्द से अपने प्रदानमंत्री जी कहरहे थे।

आप सब को थोडे दिन के लिए घर रहना है।

अपने को बचाने का है।

अपने को ठीक करने का है।और सारी दुनिया को बचाने का है।

खुद को भी बचाने का है।अपने गीता भगवान का भी ज्ञान ऐसा है।दुखों से पापों से जन्म मरण से।

बहुत बातों से बच जाते हैं।भगवान दादा कह रहे है।
मेरेको कभी कभी लगता है। इतने दर्द से प्रधानमंत्री मत्री जी कह रहे है।

फिर भी कुछ लोग जो भेगाने होते है।बे समझ जो होते है।पुरी तरह से अपनाते नही है।हाथ पकडे गे मिलेंगे बीमारी को फेलाते है।

अपने को कमजोर ना समझ
अपने को कमजोर ना समझ

हमने देखा है।

ये बीमारी हमारे भारत मे आती नही जो बाहर से आए है उस से ही बीमारी फेल गई है।

बीमारी से बीमारी बढती गई।

आगे हो गई ः भगवान जी ने कहा ः हमको लगता है हर एक राही को हर एक बच्चे को इस ज्ञान कि शक्त जरूरत है।

क्योंकि इस ज्ञान से मनुष्य का हर्दय बिल्कुल पवित्र और सुद हो जाता है ।

निर्माता भाव आ जाता है।

साफ दिल बन जाता है।

उसके हिर्दय में प्रेम ही प्रेम आ जाता है।

जगत के उदार के लिए जीता है।सब का कल्याण हो जाए बेडा पार हो जाए।गुरु कभी किसी को अपना आधार नही देता है कि में बेडा हू।

तुम मेरा आधार लेना। नही तुम मेरे ज्ञान का आधार लेना।ज्ञान के वचनों को सुन के अमल में लाना।सच्चा भगत गुरु का बनना ।

सच्चा भगत कौन बनता है किसको कहते है ये भगत है।

जो सच में वचनों को अमल में लाता है। गुरु का वचन कोई मुश्किल भी नही है नबा चौडा भी नही है।

सुबह से रात तक एक ही वचन चलता है।

अगर तू देह में रहेगा तो दुखो से बच नही सकेगा।

तभी गुरु नानक साहब ने रटन करते करते दुनिया के सब लोगों से मिले गरीब में गरीब फिर अमीर से भी अमीर।

राजा से मिले देखा सब दुखी लगे पढे है।

💐सगल सृष्टि का राजा दुखिया।
कभी अन्दर में जाकी दे कर पुछे। हम क्या बनना चाहते. है।

कडोर पति अरब पति में कुछ बनू।

दादा जी कहते है :

हमे बडे दादा भगवान के आगे आकर बेठते थे तो हमेशा कहते थे।

बी नथिग डु नथिग। समझ में नही आता था ऐसे केसे होगा।

कुछ बने भी नही कुछ करें भी नही तो दुनिया में चलेंगे कैसे? दादा जी ने समझाया।

बी नथिग का मतलब होता है।

निरकारी होनाः ऐसा नही सो जाना में अभी कुछ नही हु चुप कर के बेठा हु।

दुख एक ऐसी उत्तम वस्तु है जो हमारी आंखें खोलता है
दुख एक ऐसी उत्तम वस्तु है जो हमारी आंखें खोलता है

नही कर्म करना तेरा धर्म है।

अपने धर्म में तुम रहना कर्म करते रहना।

लेकिन अन्दर में अहनकार न करना।

डू नथिग ः माना तुम्हारे अन्दर में जो करता भाव है।करता तो भरता ।

करता तो मरता।करता भाव हि तुम्हारा कर्म बनता है ः अच्छे कर्म करते है तो अच्छा फल मिलता है।

बुरे कर्म का बुरा फल मिलता है

अच्छे कर्म का फल अच्छे घर में जन्म में होता है पैसे वाले घर में जन्म होता है ः सुख में जीवन जीता है।पर शान्ति नही होती है। शान्ति ज्ञान से ही मिलती है।

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