संत वो होते हैं जो अपना अंत जानते हैं

संत वो होते हैं जो अपना अंत जानते हैं

🌻अपनी इच्छा में परमात्मा की इच्छा मिला लो..

मतलब जो परमात्मा की मर्जी वो तुम्हारी मर्जी..

क्योंकि हमारी भलाई हमसे ज्यादा परमात्मा को मालुम है.. में क्या जीनु हे रघुराई तु जाने मेरी किस में भलाई ..

इसलिए अपनी मर्जी परमात्मा की मर्जी से मिलाओ..भगवान हमेशा सबका भला करते हैं ..

🌻ये ज्ञान गुढ़ है ..ज्ञानी न एक धर का न एक शहर का है..

वो को सारे विश्व का होता है..मतलब गुरु हमें विश्व आत्मा बनाते हैं..विशालता से जोडते हैं.. अपने लिए जीए तो क्या जीए जी ए दिल जमाने के लिए..

🌻पहले हम अपनी हस्ती में रहते हैं..सुस्ती में रहते हैं..

जब गुरु जीवन में आए तो सब परेशानियों से बचकर अपनी आत्म मस्ती आ गए.

गुरु ने जीना सीखाया.. जो तु चाहे सो तु आहेमतलब गुरु जी हैं..

कि जैसा हम सोचते हैं वैसे हम बन जाते हैं..तो क्यों न अच्छा सोचे..अच्छा चाहे..अपने मन को मजबुर नही मजबुत बनाओ..

🌻धर की परिस्थितियों से घबराकर भागो नही..

जागो . भगवान ने हमे़ं जहाँ रखा है वो उत्तम में उत्तम जगह है..

धर में अगर जुते की नोक पर भी खाना मिले तो वही रहना क्योंकि बाहर की दुनिसां तुम्हें मालुम नहीं कैसी है..आप धर में बड़ों की छाँव में हो..

अपने भाग्य को सराहो..गुरु जी कहते हैं कोई जुते की नोक पर खाना नहीं देता..

बस थोड़ा टोकते है या उल्टे शब्द बोलते हैं. उससे दुखी मत होना..लाखों लोगों से सुखी हो आप..सीता या मीरा जैसे दुख थोड़े मिले हैं ..भगवान ने सबसे अच्छी जगह हमें रखा है..

संत वो होते हैं जो अतिशय सहते हैं ..संत वो होते हैं जो अपना अंत जानते हैं .

🌻शुक्रराना गुरु का..हरी ॐ🌿🌹🌿🌹🌿🌹

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