सत्संग एक आईना है

गुरु जी ने बताया कि

🌹या तो इतने छोटे बन जाएं, की कोई बांध ना सके या इतने बड़े, बन जाएं कि रस्सियां छोटी पड़ जाएं,,,,,,,,,,,,।

🌹कानो की सावधानी रखें कि किसी की निंदा ना सुनाई दे,,, इस से भी कर्म बनते है ।

🌹आंखों की भी सावधानी रखनी है कि इस से किसी के भी कर्म ना दिखें किसी के भी कर्म देखना नए कर्म बना ने के समान होता है ।

🌹सत्संग एक आईना है जिस में हम अपने अवगुणों को सुधार कर गुणवान बनते है ।

🌹ज्ञान की भट्ठी में अपने जीव भाव को डाल दो तो कर्मो से मुक्ति मिल जाएगी ।

🌹संसायात्मक बुद्धि को निश्चयात्मक बुद्धि बना ना है

🌹बाहर के दीपक बहुत जलाएं,,,,अब 24 घंटे सुझागी का दिप जलाना है ।

🌹अब ज्ञान के बाद कर्मो की सावधानी रखनी है ।

🌹शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ ।

Divine Guru ji vaani

  • 1🌹दुनियां में सतगुरु के समान दातार कोई नहीं क्योंकि उसका दा hन पाकर अंघा अज्ञानी भी आँखों वाला ज्ञानी बन जाता है..
  • 2🌹दुनियां में हर प्रकार के विद्वान पंड़ित तत्व वेता कलाकार आसानी से मिल सकते हैं..किंतु सतगुरु का मिलना अंत्यत कठीन है..
  • 3🌹हर वस्तु की खरीद के लिए घन की आवश्कता होती है..किंतु जो चीज सतगुरु से मिलती है उसके लिए श्रद्घा रुपी धन की आवश्कता होती है..
  • 4🌹ज्योति की लौ को सौ बार तलवार चलाने से कुछ भी पीड़ा नहीं पहुँचाई जा सकती..तब ज्ञान के प्रकाश को कौन नष्ट कर सकता है..वह अमर ज्योति तुम्हारे हृदय में जल रही है..सतगुरु का संग करके दर्शन करोे तुम अमर हो जाओगे..
Guru vaani prem satguru
Guru vaani prem satguru
  • 5🌹हरी ॐ सतगुरु..हरी हर विघा ओर कला को सिखने के लिए गुरु की आवश्कता होती है..जो सत्य की शिक्षा ओर सत्य में स्थिर बना कर खड़ा करता है वही सतगुरु है..
  • 6🌹जो सतगुरु को अपना आत्म स्वरुप करके देखता है..वो ही सतगुरु से सच्चा लाभ प्राप्त करता है..जो सतगुरु को अपने से अलग व दुर समझता है वो सतगुरु से पुरा लाभ प्राप्त नहीं कर सकत्ता ..
  • 7🌹शिक्षा वो कोष है जिसके देने वाले प्राय द्ररिद ओर लेने वाले सदा भुखे..देने वाले इसलिए द्ररिद है क्योंकि विघा की अपार ओर बेंअंत नीति से ओर कठीनाई से कोडियों ही उन्होंने प्राप्त की है ओर लेने वाले इसलिए भुखे है क्योंकि भुख कभी तृप्त नही होती ..
  • 8🌹हर जगह सतसंग होते है ओर गुरु दिखाई देते हैं तो भी संसार में दो वस्तुएं दुर्लभ हैै..एक सतसंग दुसरा सतगुरु..
  • 9🌹– जो दिल के बुझे हुए दीपक को जलाकर भीतर बाहर का अंघकार नष्ट करता है..उसका एहसान उमर भर गाया दाए तो भी कम है..🌿🌹🌿🌹🌿🌹
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