सत्य

सत्य में टिके बिना सत्य को नही जान सकते

गुरु जी ने बताया कि

🌻स्वयंम से सच्चे बन जाएं ।

🌻जब किसी का पत्र पढ़ते है,,तो उसकी छवि मस्तिक में आ जाती है,तो जब हम गुरु की वाणी पढ़ेगे ,लिखेंगे ,सुनेंगे तो क्या गुरु की छवि हमारे मस्तिक में नही आ सकती ?

🌻सत्य में टिके बिना सत्य को नही जान सकते ।

🌻2020 आ गया अब तो ज्ञान पाने के लिए बीसो नाखुनो का जोर लगालो ।

🌻इस साल प्रण ले लो कि 20 आने गुरु का हुकुम मानेंगे ।

🌻2020 में कम से कम 20 सूत्र (वचन ) अपने जीवन मे लगा लो ।

🌻2020 कह रहा है,,,,सबको दो (2) प्रेम, ,ज्ञान , सेवा,,,,,,,और ( 0 ) शून्य हो जाओ ।

🌻21,600 साँसे मिलती है एक दिन में उसमे से कम से कम 2 : 15 घण्टे सत्संग में रहें ।

🌻अष्टावक्र गीता में 20 प्रकरण है,उसमे से एक प्रकरण जीवन मे लगा लेंगे तो जीवन सुलभ हो जाएगा ।

🌻शुक्राने सतगुरु जी के हरि ॐ।

गुरु बोलता है हस्ती भाँति प्रिय मे लौट आइए

विषयों का चिंतन करने वाले पुरुष को विषयों में आस्कति हो जाती है..

आस्कति से विषयों की कामना उत्पन्न होती है..ओर कामना में बाघा उत्पन्न होने पर क्रोघ की उत्पति होती है..
आत्म निष्टा में चिंतन नहीं होता..चिंतन बुद्घि के स्तर पर है..

मन के स्तर पर नहीं है..सदगुरु की शरण में बैठकर श्रद्घा पुर्वक वचन लेने से हम तत्व बोघ को प्राप्त होते हैं..
संसार में बुद्घि उल्टे मार्ग पर जाती है..

जिसके पास अपनी रस नहीं है वही बाहर रस लेने के लिए भटकेगा..ऐसे मन को गुरु ने जागृत कर दिया..तो बुद्घि भी शांत ओर निश्चा्यत्मक हो जाती है..

बुरी बातें या जो बातें तकलीफ दे उनको भूल जाओ

🌷जहाँ तेरा मेरा होगा तो सम भाव कैसे होगा..प्यार कैसे होगा..तुम शांत करो कोई शोर नहीं ..ये तभी होगा जब जानोगे की में वो शांत स्वरुप प्रकाश स्वरुप है..

गुरु हमारे मन से सब चाहनाएं निकाल कर आराम में ले आता है..जब कान्हा ही धर तोरे तो का नही धर तोरे..हमारी बुद्घि को हरने के लिए एक ही आस्कति काफी है..

विषयों के प्रति राग हमें बंघता है..
ज्ञानी संसार में सम भाव से रहता है..जैसे जीभ पर कोई स्वाद अटकता नहीं..

ज्ञानी ऐसे है जैसे बाजार से निकाली हुँ खरीदार नहीं हुँ..सकल के मघ्य सकल से उदास..
वो नित्य परमात्मा ही रहने वाला है..

वही परमात्मा गुरु रुप में हमें सब बंघनों से वास्तव में बचाता है..

सब तभी बोलते हैं हमने सर्वस्व बारा..
मोह हमको अंघेरो मे ले जाता है..

गुरु बोलता है हस्ती भाँति प्रिय मे लौट आइए..नाम रुप भुला के आंनद पाइए.. शुद्घ प्रेम में वापसी की इच्छा नहीं होती..

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