शरीर के लिए योगा, मन के लिए योग जरूरी होता है

शरीर के लिए योगा, मन के लिए योग जरूरी होता है

गुरु जी ने बताया कि

🍄अगर कोई हमारी प्रशंसा कर रहा है, तो मन को ये भाव दो की, भगवान की प्रशंसा हो रही है, जब प्रशंसा भगवान की तो निंदा भी तो भगवान की हुई ना ।

दुख एक ऐसी उत्तम वस्तु है जो हमारी आंखें खोलता है
दुख एक ऐसी उत्तम वस्तु है जो हमारी आंखें खोलता है

🍄योग का मतलब परमात्मा से जुड़न , योगा मतलब प्राणायाम ,जो शरीर स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है ।

🍄एक जन्म हमारा माता पिता से होता है, दूसरा सच्चा जन्म हमारा गुरु मुख से होता है ।

🍄जब किसी से मन से जुड़े होते है, तो उसको खोने का डर रहता है, जब योग से जुड़े होते है तो निर्भय हो जाते है ।

🍄शरीर के लिए योगा, मन के लिए योग जरूरी होता है ।

इच्छा को रोकना भी इच्छा है
इच्छा को रोकना भी इच्छा है

🍄जो परमात्मा से जुड़ जाता है, उस से कभी गलती नही हो सकती ।

🍄जब हमारा भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण होगा तो वो हमारी रक्षा जरूर करते है ।

🍄जो जैसा है उसको वैसा ही स्वीकार करें ।

🍄जब किसी के दोष दिखें तो मन को भाव दो ” ऐसा भी होता है ।

🍄शुक्राने सतगुरु जी के , हरि ॐ ।

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