shopping list

शॉपिंग लिस्ट

शालिनी आईने के सामने खड़ी होकर साड़ी के पल्लू अपने कंधे पर सलीके से जमाते हुए बोली, “राज”इस बार मैं दिवाली शॉपिंग के लिए बहुत लेट हो गयी हूँ,

मिसेस तनेजा ने तो वृद्धाश्रम जाकर मिठाई और कपड़े बाँट कर, अपनी पोस्ट फेसबुक मे भी डाल दी, और, मिसेस वोहरा भी अनाथालय में गिफ्ट बांटती हुई अपनी फोटो इंस्टाग्राम में डाली है,
“राज”तुम सुन भी रहे हो मै क्या बोल रही हूँ।


“राज”झुंझला कर बोला, हां यार सुन रहा हूँ मैंने तुझे कब मना किया था, shopping के लिए, ड्राइवर को लेके चली जाती और तुम भी किसी आश्रम में दें आती जो तुम्हें देना है, और अपनी नेकी करती तस्वीरें डाल देतीं फेसबुक पर,


मुझे क्यूँ सुना रही हो।शर्ट की बटन लगाते हुए”राज”बोला अब और कितनी देर लगाओगी तैयार होने में,


मुझे आज ही अपने स्टाफ को बोनस बांटने भी जाना है,जल्दी करो मेरे पास टाईम नहीं है। कह कर रूम से बाहर निकल गया।”राज” तभी बाहर लॉन मे बैठी “माँ” पर नजर पड़ी।
कुछ सोचते हुए वापिस रूम में आया।शालू तुमने माँ से भी पूछा कि उनको दिवाली पर क्या चाहिए।


शालिनी बोली नहीं पूछी। अब उनको इस उम्र मे क्या चाहिए होगी यार, दो वक्त की रोटी और दो जोड़ी कपड़े इसमे पूछने वाली क्या बात है।


वो बात नहीं है शालू,माँ पहली बार दिवाली पर हमारे घर में रुकी हुई है। वरना तो हर बार गाँव में ही रहती है तो,औपचारिकता के लिए ही पूछ लेती।


अरे इतना ही माँ पर प्यार उमड़ रहा है।तो खुद क्यूँ नही पूछ लेते झल्लाकर चीखी थी शालू, और कंधे पर हेंड बैग लटकाते हुए तेजी से बाहर निकल गयी।


“राज”माँ के पास जाकर बोला, माँ हम लोग दिवाली के खरीदारी के लिए बाजार जा रहे हैं,आपको कुछ चाहिए तो।


माँ बीच में ही बोल पड़ी, मुझे कुछ नही चाहिए बेटा।
सोच लो माँ अगर कुछ चाहिये तो बता दीजिए।


“राज”के बहुत जोर देने पर माँ बोली ठीक है,तुम रुको मै लिख कर देती हूँ। तुम्हें और बहू को बहुत खरीदारी करनी है। कहीं भूल ना जाओ कहकर,”राज” की माँ अपने कमरे में चली गई, कुछ देर बाद बाहर आई और लिस्ट “राज”को थमा दी।

pen and paper

“राज”ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए बोला, देखा शालू माँ को भी कुछ चाहिए था।पर बोल नही रही थी, मेरे जिद्द करने पर लिस्ट बना कर दी है,इंसान जब तक जिंदा रहता है, रोटी और कपड़े के अलावा भी बहुत कुछ चाहिये होता है।


अच्छा बाबा ठीक है पर पहले मैं अपनी जरूरत की सारी सामान लूँगी।बाद में आप अपनी माँ की लिस्ट देखते रहना, कह कर कार से बाहर निकल गयी।


पूरी खरीदारी करने के बाद शालिनी बोली अब मैं बहुत थक गयी हूँ। मैं कार में Ac चालू करके बैठती हूँ आप माँ जी का सामान देख लो।


अरे शालू तुम भी रुको, फिर साथ चलते हैं मुझे भी जल्दी है।
देखता हूँ माँ इस दिवाली क्या मंगायी है।कहकर माँ की लिखी पर्ची जेब से निकलता है।

बाप रे इतनी लंबी लिस्ट,पता नही क्या क्या मंगायी होगी।जरूर अपने गाँव वाले छोटे बेटे के परिवार के लिए बहुत सारे सामान मंगायी होगी,और बनो श्रवण कुमार कहते हुए गुस्से से सुरज की ओर देखने लगी, पर ये क्या सूरज की आंखों में आंसू, और लिस्ट पकड़े हुए हाथ सूखे पत्ते की तरह हिल रहा था।पूरा शरीर काँप रहा था,


शालिनी बहुत घबरा गयी क्या हुआ ऐसा क्या मांग ली है तुम्हारी माँ ने कह कर”राज”की हाथ से पर्ची झपट ली।
हैरान थी शालिनी भी इतनी बड़ी पर्ची में बस चंद शब्द ही लिखे थे,पर्ची में लिखा था।


बेटा सूरज मुझे दिवाली पर तो क्या, किसी भी अवसर पर कुछ नहीं चाहिए। फिर भी तुम जिद्द कर रहे हो तो, और तुम्हारे शहर की किसी दुकान में अगर मिल जाए तो फुर्सत के कुछ पल मेरे लिए लेते आना,ढलती साँझ हुई अब मैं,

“राज” मुझे गहराते अँधियारे से डर लगने लगा है, बहुत डर लगता है। पल पल मेरी तरफ बढ़ रही मौत को देखकर, जानती हूँ टाला नही जा सकता। शाश्वत सत्‍य है,पर अकेले पन से बहुत घबराहट होती है।

“राज” बेटा जब तक तुम्हारे घर पर हूँ। कुछ पल बैठा कर मेरे पास कुछ देर के लिए ही सही,बाँट लिया कर मेरा बुढ़ापा का अकेलापन, बिन दीप जलाए ही रौशन हो जाएगी मेरी जीवन की सांझ,कितने साल हो गए,

man crying

“राज”बेटा तूझे स्पर्श नही किया। एक फिर से आ मेरी गोद में सर रख और मै ममता भरी हथेली से सहलाऊँ,तेरे सर को एक बार फिर से इतराए मेरा हृदय मेरे अपनों को करीब बहुत करीब पा कर,और मुस्कुरा कर मिलूं मौत के गले।क्या पता अगले दिवाली तक रहूँ ना रहूँ।
पर्ची की आख़री लाइन पढ़ते पढ़ते शालिनी फफक, फफक कर रो पड़ी।


ऐसी ही होती है माँ।मेरे समस्त अजीज मित्रों को और उनकी माताओं को मैरी और से समर्पित। आपका अपना Mr. राज (अनजान).

More Hindi stories

27 Shares
Share via
Copy link
Powered by Social Snap