सांपों की 3,000 से अधिक विभिन्न प्रजातियां हैं

अगर साँप इतना विषैला होता है तो वह खुद अपने अंदर के विष से क्यों नही मरता है?

दुनिया में सांपों की 3,000 से अधिक विभिन्न प्रजातियां हैं, और इनमें से 10% से अधिक विषैले हैं। उन 10-15% में से, कुछ प्रजाति मनुष्यों के लिए खतरनाक है। तो सवाल उठता है कि अगर सांप का जहर इतना शक्तिशाली और जानलेवा है, तो उसके अंदर के जहर से वह खुद क्यों नही मर जाता है?

सांपों की 3,000 से अधिक विभिन्न प्रजातियां हैं
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सांप का जहर, लार का एक विशेष रूप होता है जिसमें विषाक्त पदार्थ होता है और यह मनुष्य की लार ग्रंथि जैसी किसी चीज़ में जमा होता है। एक बार इन ग्रंथियों में जहर बनने और जमा हो जाने के बाद, यह शरीर के माध्यम से वापस नहीं जाता है, जिससे अन्य अंग संक्रमित हो जाएेै, ठीक उसी तरह जैसे यह अपने शिकार को संक्रमित करता है। विष एक विशेष रूप से संरक्षित ग्रंथियों में संग्रहीत होता है। जब तक कि इसे नुकीले नलिकाओं के माध्यम से नीचे नही ले जाया जाये और साँप इसे शिकार कें शरीर मे नही पहुचा दे।

सांप का जहर मुख्य रूप से प्रोटीन से बना होता है

जिसका अधिकांश हिस्सा पेट में मांस वाले प्रोटीन की तरह टूट जाता है। दूसरे शब्दों में, प्रोटीन-आधारित जहर खाना बहुत हानिकारक नहीं होगा, क्योंकि वे पेट में बेअसर हो जाएगा। अगर वह विष किसी तरह से पेट से बच निकल और रक्तप्रवाह में प्रवेश करता है (काटने के माध्यम से), तो वह अंग प्रणालियों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देंगे। जब ये विषाक्त प्रोटीन पेट में टूट जाते हैं, तो वे अपने सरल, हानिरहित अमीनो एसिड में अलग हो जाते है।

सांप का जहर
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ऐसा ही खाने के मामले में सांपों के साथ होता हैें। इनका प्रोटीन वाला ज़हर रक्षा के अलावा, शिकार को दुर्बल करने और पचाने का कार्य करते हैं। जब वे शिकार (यहां तक ​​कि एक अन्य सांप) को खातेे हैं, तो वे अपने भोजन को पचाने के दौरान इस प्रोटीन टूटने की प्रक्रिया के माध्यम से अपने स्वयं के विष को बेअसर करने में सक्षम होते हैं।

शोधकर्ताओं के मुताबिक कि एक ही प्रजाति के सांप अक्सर अपने विषैले हमलों का इस्तेमाल नहीं करते हैं।

क्योंकि सांप जानते हैं कि उनका विष लड़ाई में फायदा नहीं देगा, और वे विष को संरक्षित रखते हैं और जीतने के लिए अपनी क्रूर ताकत का उपयोग करते हैं।

इसके अलावा, कुछ सांप अपने स्वयं के विष की बड़ी मात्रा से अतिसंवेदनशील होते हैं, क्योंकि वे निम्न स्तर के विष को संभालने के लिए ही विकसित हुए हैं। इसलिए, अगर सांप अपनी पूंछ को ही शिकार कि पूछ मानकर काट लेतें हैं और विष की एक पूरी खुराक को इंजेक्ट करते हैं, तब जल्दी असर करने वाला जहर किसी मासपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है या उस जगह को गला सकता है। हालांकि सांप के मरने की अपेक्षाकृत कम संभावना है।

अतिसंवेदनशील
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लेकिन इस क्षेत्र में निश्चित शोध का अभाव है, जिससे सांपों की मौत पर शोध करने की नैतिक और तार्किक जटिलताएं सामने आती हैं। सांप अपने आंतरिक विष स्तर के विशेषज्ञ प्रबंधक प्रतीत होते हैं। साँप पेट की प्रोटीन टूटने की ताकत पर निर्भर करते हैं, ये सभी उन्हें अपने स्वयं के विष और अधिकांश सांपों के जहर से सुरक्षित रखते हैं। साँपो की एंटीबॉडी( इनका प्रयोग प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा बैक्टीरिया तथा वायरस जैसे बाह्य पदार्थों को पहचानने तथा उन्हें बेअसर करने में किया जाता है।) भी इन्हें विष के असर से बचाती है।

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