वक़्त की अच्छी आदत होती है जैसा भी हो गुजर ही जाता है

वक़्त की अच्छी आदत होती है जैसा भी हो गुजर ही जाता है

गुरु जी ने बताया कि

🍂एक बार एक समुंदर किनारे पर लहरें आती जा रही थी , उन लहरों में मछलियां बाहर रेत में आकर तड़प रही थी, एक लड़का उन मछलियों को वापस समुंदर में डालता जा रहा था ,

दूसरे व्यक्ति ने बोला कितनी मछलियां डालोगे इतनी सारी है, वो लड़का बोला जितनी मेरे सम्पर्क में आएंगी उनको बचा सकता हु,

ऐसे ही गुरु जी कहते है कि माया की आग में कितने सारे लोग तड़प रहे है, पर जो मेरी शरण मे आ जाएंगे ,उनको मैं माया की आग से बचा लूंगा,,,,,,,,,,,,,।

🍂या तो माया में ही रहो या तो पूरे के पूरे भगवान के हो जाएंगे तभी आत्मिक आनंद मिलेगा,,,,,,,,,,,,,।

🍂पहले हमारा स्वभाव था मक्खी जैसा जो गंदगी में पड़ा रहता था , गुरु ने मधु मक्खी बना दिया, अब सबके गुण ही दिखाई देते है,,,,,,,,,,,।

🍂सीता मैया ने सोने के हिरण में मन रखा श्री राम से दूर हो गई, रावण उठा गया, हमे भी माया रूपी रावण से बचना है तो प्रभु की शरण मे ही रहना होगा,,,,,,,,,,,,,।

🍂वक़्त की अच्छी आदत होती है जैसा भी हो गुजर ही जाता है,,,,,,,,,,,,,।

🍂शुक्राने सतगुरु जी के , हरि ॐ,,,,,,,,,,,,,।

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